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​ऋतु तावड़े बनेगी मुंबई की महापौर


मुंबई:
भाजपा नेता और कॉर्पोरेटर ऋतु  तावड़े को मुंबई मेयर पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। ऋतु  तावड़े मुंबई की 78वीं मेयर होगी।

ऋतु तावड़े पहली बार 2012 में वार्ड नंबर 127 से चुनी गईं थी, बाद में 2017 में घाटकोपर में वार्ड नंबर 121 से चुनी गईं और 2025 के चुनावों में वार्ड नंबर 132 से जीतीं।वह मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की एजुकेशन कमिटी की चेयरमैन भी रह चुकी हैं। पार्टी और संगठन में लंबे अनुभव के चलते ऋतु  तावड़े को पहले से ही मेयर पद की मजबूत दावेदार माना जा रहा था और सबसे खास बात यह है कि मराठा समुदाय से होने के बावजूद उन्होंने गुजराती बहुल वार्ड में अपनी अच्छी पकड़ बनाई है।  

ऋतु  तावड़े लंबे समय तक कांग्रेस में रही हैं और साल 2012 में कांग्रेस छोड़कर उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था तथा खबरों की माने तो महत्वपूर्ण यह है कि मेयर कौन होगा इसका फैसला दिल्ली से लिया गया है। इस बार महापौर के प्रमुख दावेदारों में भाजपा की मुंबई महिला विंग की प्रमुख शीतल गंभीर देसाई, घाटकोपर से तीन बार की पार्षद और शिक्षा समिति की पूर्व अध्यक्ष ऋतु तावड़े और सायन से तीन बार की पार्षद और बीएमसी प्रशासन में व्यापक अनुभव रखने वाली राजश्री शिरवाडकर का नाम मेयर के लिए दौड़ में शामिल था और बाजी ऋतु तावड़े के हाथ लगी और उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया है तथा महापौर पद के लिए मतदान 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे बीएमसी मुख्यालय में होगा।

मुंबई में दूसरी बार भाजपा के पास मेयर का पद आया है वह भी 43 साल बाद क्यूंकि  सत्तर के दशक से ही मनपा महापौर पद पर ठाकरे परिवार का ही दबदबा रहा है वैसे इस बार के चुनाव परिणाम से महाराष्ट्र के सैकड़ों नगरपालिकाएं  और महानगरपालिकाएं अब लगभग ठाकरे-मुक्त हो चुकी है। ऋतु तावड़े को मेयर बनाकर भाजपा ने यह भी साफ़ किया है कि अब उसका हर क़दम भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है। ऋतु का स्थानीय प्रभाव मजबूत है, ज़मीन से जुड़ी हैं। ऋतु जिस घाटकोपर से जीतती हैं, वहाँ गुजरातियों की अच्छी-खासी जनसंख्या है। मराठा होने के बावजूद ऋतु को वहाँ हर समूह से अच्छा समर्थन मिलता रहा है।

2017 में यही ऋतु तावड़े कॉर्पोरेटर का चुनाव हार गई थी, तब उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन वो देश के सबसे समृद्ध नगर पालिका को चलाएँगी। एक और ध्यान देने वाली बात ये है कि महाराष्ट्र में RSS का मुख्यालय होने के बावजूद भाजपा ने संघ बैकग्राउंड का महापौर नहीं बनाया है वैसे यह भी ध्यान दीजिए कि वह मुंबई में भाजपा की पहली मेयर नहीं हैं। 1982-83 में भाजपा के प्रभाकर पाई इस पद को संभाल चुके हैं। मुंबई तब बॉम्बे हुआ करती थी और प्रभाकर पाई मूल रूप से कर्नाटक के थे। यह भी एक संयोग है कि वे भी पहले कांग्रेसी ही हुआ करते थे।

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