वाराणसी:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम के बीच वाराणसी में प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई और इस दौरान दोनों नेताओं ने आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया एवं चागोस समझौते का समापन ऐतिहासिक घोषणाओं के साथ हुआ जिसमे मॉरीशस समकक्ष के साथ वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री रामगुलाम जी और मॉरीशस के लोगों को चागोस समझौता संपन्न होने पर हार्दिक बधाई देता हूँ और भारत ने हमेशा उपनिवेशवाद और मॉरिशस की संप्रभुता की पूर्ण मान्यता का समर्थन किया है और इसमें पहले भी भारत, मॉरीशस के साथ दृढ़ता से साथ खड़ा रहा है क्योंकि मॉरीशस, भारत की पहली नीति और दृष्टि में 'महासागर' एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और भारत और मॉरीशस सिर्फ साझेदार नहीं बल्कि परिवार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि मॉरीशस के लिए भारत का पहले पड़ोसी की नीति और विजन महासागर का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मन कर चल रहा है एवं मार्च में मुझे मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ तथा उस समय हमने हम दोनों के दस्तावेजों को उन्नत रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया।
वहीं मॉरीशस का कहना है कि मॉरीशस के लिए यह गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है। न्याय और संप्रभुता के लिए भारत को मजबूती से खड़ा देखकर बहुत अच्छा लगा रहा है।
भारत और मॉरीशस के बीच MOUs के कुछ अंश :
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन।
- वैज्ञानिक औद्योगिक अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान और मॉरीशस समुद्र विज्ञान संस्थान के बीच समझौता ज्ञापन।
- कर्मयोगी भारत, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार और लोक सेवा एवं प्रशासनिक सुधार मंत्रालय, मॉरीशस सरकार के बीच समझौता ज्ञापन।
- उपग्रह प्रक्षेपण यानों के लिए टेलीमेट्री ट्रैकिंग एवं दूरसंचार स्टेशनों की स्थापना और अंतरिक्ष अनुसंधान, विज्ञान एवं अनुप्रयोग के क्षेत्र में सहयोग हेतु भारत सरकार और मॉरीशस सरकार के बीच समझौता।