Today Wednesday, 04 February 2026

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156 में टुकड़ों में बटें उत्तरभारतीय जीता पाएंगे अपने प्रत्याशी


मुंबई:
चांदिवली विधानसभा के अंतर्गत प्रभाग क्रमांक 156 की सीट पर बदलाव या दोहराव के कशमकश के बीच चुनावी प्रचार जोरों शोरों पर चल रहा है जहां पर स्लम बस्तियां, आवासीय बिल्डिंग्स एवं छोटे-मोटे कारखाने बहुतायत में है और उसमे से तुंगा गांव का क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसमे से निचले भाग के तुंगा में बीजेपी-शिवसेना के उम्मीदवार अश्विनी अशोक माटेकर और ऊबाठा-मनसे से उम्मीदवार संजना संतोष कासले के धमक का एहसास होता है एवं अपर तुंगा में कांग्रेस के उम्मीदवार सविता शरद पवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार ) की चमक दिखाई देती है तथा दो महिला प्रत्याशियों के पति इस प्रभाग के नगरसेवक रह चुके हैं इसलिए प्रभाग में दोनों में ही कड़ी टक्कर बताई जा रही है। प्रभाग में मराठी, उत्तर भारतीय एवं मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में है इसलिए यहां पर उम्मीदवार के चहरे के अलावा विचारधारा और नैरेटिव पर भी चुनाव लड़ा जा रहा है। 

प्रभाग 156 में तीन मजबूत उम्मीदवार मराठी भाषिक है इसलिए मराठी वोट का बटवारा निश्चित है इसलिए इस समीकरण को समझते हुए तीनों प्रत्याशी उत्तर भारतीय एवं मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं जिसमे कुछ टुकड़ों में बटें हुए दो उत्तर भारतीय समूह जो एक दूसरे को कमतर दिखाने की कोशिश करते रहते है वे बीजेपी-शिवसेना की तरफ खड़े दिखाई दे रहे है तथा एक और उत्तर भारतीय समूह खासकर OBC वर्ग कांग्रेस की तरफ मुडता हुआ प्रतीत हो रहा है जिसकी खास वजह यह बताई जा रही है कि इन सभी का मानना है कि बीजेपी-शिवसेना का प्रत्याशी जीतने पर बिल्डर से सांठ-गांठ कर उनके घर को तोडा जा सकता है जिसमे से कई लोगों को कुछ महीने पहले नोटिस भी मिल चुका है और वहीं कुछ लोग इसको नैरेटिव भी बता रहे हैं इसलिए इसमें कितनी सच्चाई है यह तो आनेवाला समय ही बताएगा लेकिन यदि इस प्रकार का डर बरकार रहा तो बीजेपी-शिवसेना के प्रत्याशी का चुनावी गणित बिगड़ सकता है। दूसरी तरफ कुछ मुस्लिम मतदाताओं से बात करने पर ऐसा लग रहा है कि कुछ को छोड़कर बाकी वे अपनी पुरानी भूमिका में ही रह सकते है और उनके फेर-बदल होने की संभावना कम ही दिखाई दे रही है जिससे कांग्रेस को फायदा मिल सकता है लेकिन बदलते वोट समीकरण के कारण ऊबाठा-मनसे उम्मीदवार कांग्रेस के प्रत्याशी का भी समीकरण में खलल डाल सकता है।  

इस प्रभाग में में एक और दमदार महिला प्रत्याशी मंदा राठोड राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के घडी चुनाव चिन्ह से चुनावी मैदान में उतरकर तीनों प्रत्याशियों की नींद उड़ा रही हैं लेकिन वैसे तो मंदा राठोड को बीजेपी की एक कर्मठ कार्यकर्ता के तौर पर ही जाना जाता है और वह बीजेपी की तरफ से चांदिवली विधानसभा की महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी रही है लेकिन अब वह बीजेपी से किनारा करके राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से मनपा चुनाव में अपना किस्मत आजमा रही है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार ) के कार्यकर्ता और मतदाता बखूबी उनका साथ दे रहे हैं लेकिन लोगों का कहना है कि वे आज भी बीजेपी माइंडसेट की ही हैं इसलिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य मतदाताओं का झुकाव उनकी तरफ कम ही देखने को मिलेगा। 

इस प्रभाग के क्षेत्र में बड़ी-बड़ी आवासीय बिल्डिंगो में एक साइलेंट वोटर भी हैं जो न चुनाव प्रचार में  और न कोई राजनीतिक चर्चा में दिखाई देते है वे भी आज-कल मतदान के समय बहुत बढ़ चढ़कर मतदान करते है जिनका राजनितिक दांव पेंच में कोई दिलचस्पी नहीं होती है लेकिन 2014 के बाद से देखा गया है कि ज्यादातर वे डेवलपमेंट के मुद्दे पर ही मतदान करते है जिससे  बीजेपी-शिवसेना के उम्मीदवार को इसका आसानी से फायदा मिल सकता है। 

तुंगा गांव में कई लोगो से चुनावी चर्चा करने पर एक बात सभी के मुंह से यह बात अवश्य सुनाई दिया कि कुछ भी हो लेकिन बीजेपी-शिवसेना के उम्मीदवार अश्विनी अशोक माटेकर के पति अशोक माटेकर चुनाव का समय नहीं होने के बावजूद प्रभाग क्रमांक 156 में हमेशा विभाग का विकास कार्य करते रहे थे जिससे उनको लोगों की सहानुभूति मिल सकती है लेकिन फिर भी ऐसा माना जा रहा कि इस प्रभाग में मतदान के समय विचारधारा और महाराष्ट्र सरकार की योजनाएं भी अपनी भूमिका निभाएंगी।  

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