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161 में " न जीतूंगा और न जीतने दूंगा " का माहौल
मुंबई:
चांदिवली विधानसभा के प्रभाग क्रमांक 161 में मेहनत ही मेहनत दिखाई दे रही है जिसमें सबसे पहले प्रत्याशियों को अपनी अपनी राजनितिक पार्टियों से उम्मीदवारी का टिकट लेने के लिए तगड़ी लॉबिंग के साथ मेहनत करनी पड़ी और अब अनारक्षित होने के कारण अनेक उम्मीदवारों के भीड़ में से जीत का परचम लहराने के लिए उससे भी ज्यादा कड़ी मेहनत और मशक्क्त करनी पड़ रही है तथा इस प्रभाग की एक खास बात यह है कि सभी उमीदवार अपनो से ही लड़ रहे है इसलिए इस प्रभाग का चुनाव बड़ा दिलचस्प हो गया है वैसे प्रभाग के भौगोलिक संरचना को देखे तो इसके मुख्य क्षेत्र लोकमान्य टिळक नगर, महात्मा फुले नगर, वीर सावरकर नगर,लाल बहादुर शास्त्री नगर, राजीव नगर, 3 नंबर खाड़ी एवं अशोक नगर के कुछ भाग हैं और प्रभाग की जनसँख्या लगभग 57,741 है।
प्रभाग में सबकी नजरें शिंदे शिवसेना के प्रत्याशी विजू शिंदे पर टिकी है कि वे अपनी जीत को फिर से दोहरा पाएंगे कि नहीं लेकिन पिछले 10 दिनों के उनके कार्यशैली और रणनीति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि उन्होंने प्रभाग के वे एक बड़े मराठी वोट बैंक को एकजुट करने में सफल हुए है जिसमें सेंध लगाना मुश्किल है लेकिन इस मराठी वोट बैंक को डेंट करने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार ) के उम्मीदवार प्रदीप बंड और ऊबाठा-मनसे से उम्मीदवार इरशाद नबी सय्यद जरूर प्रयास कर रहे है फिर भी दोनों उम्मीदवार अपने कोशिश में सफल होते हुए नहीं दिखाई दे रहे है। इस बार चुनाव में बीजेपी - शिंदे शिवसेना के प्रत्याशी विजू शिंदे की असली लड़ाई अपक्ष उम्मीदवार पूर्व नगरसेवक स्व. हरीश शुक्ला की पत्नी लीना शुक्ला से है जो मूलतः मराठी समाज से है और पति के निधन के बाद समाज का धड़ा उनके प्रति सहानुभूति के रूप में समर्थन दिखा रहा है। अपक्ष उम्मीदवार लीना शुक्ला को उत्तर भारतीयों के कुछ गुट खुलकर समर्थन कर रहे हैं और खासकर चांदिवली विधानसभा के विद्यमान आमदार दिलीप मामा लांडे के समर्थक हैं, लेकिन स्थानिक लोगो का कहना है कि वर्ष MLA 2024 के चुनाव में जब विजू शिंदे कांग्रेस में थे तब भी उनके समर्थकों ने शिंदे शिवसेना के उम्मीदवार दिलीप मामा लांडे को जिताया था फिर आमदार के समर्थकों को भी बीजेपी - शिंदे शिवसेना के उम्मीदवार विजू शिंदे का समर्थन करना चाहिए। वैसे यह तो साफ़ है कि विजू शिंदे के लिए बीजेपी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता काफी मेहनत कर रहे है। कुछ पट्टे में जैसे 3 नंबर खाड़ी के जयहिंद सोसायटी या खुशलेश्वर महादेव मंदिर के आस-पास के उत्तरभारतीय या मराठी मतदाताओं में पहले नाराजगी जरूर दिखाई दे रही थी लेकिन यहाँ के मतदाताओं की राजनीतिक मजबूरी कहें या विजू शिंदे की रणनीति जो कुछ दिनों से इन मतदाताओं का झुकाव भी विजु शिंदे की तरफ बढ़ रहा है और राजीव नगर के भी लोगों का भी कुछ ऐसा ही विचार दिखाई दे रहा है जिसमे कई लोगो का कहना है कि जब हमारे घरों में हमारे गलियों के गटर का पानी आ रहा था तब उस वक्त हम सबके पास गए लेकिन केवल विजू शिंदे ने ही अच्छे से गटर बनवाया जो आज तक पानी नहीं भरा। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन आम उत्तरभारतीय मतदाताओ का झुकाव बीजेपी - शिंदे शिवसेना की तरफ बढ़ रहा है और लीना शुक्ला के लिए भी दमदार फील्डिंग चल रही है जो बीजेपी-शिंदे शिवसेना प्रत्याशी के चहरे पर सिकन ला सकती है।
दूसरी तरफ मुस्लिम उम्मीदवार से ज्यादा मुस्लिम मतदाता इस बार बहुत होशियारी और सतर्कता अपनाकर मीटिंग पर मीटिंग कर रहे हैं ताकि उनका वोट न बंटे जिससे उनके मनमाफिक प्रत्याशी की विजय सुनिश्चित हो सके लेकिन ऐसा लगता नहीं है क्योंकि जो मुस्लिम उम्मीदवार खड़े हैं वे एक से बढ़ाकर एक है जिसमे अबुल हसन खान वर्ष MLA 2019 के चुनाव में वंचित अघाड़ी से चुनाव लड़कर मजबूत वोट लिया था जिससे विद्यमान आमदार दिलीप मामा लांडे के लिए विजय का द्वार खुला और आज उनके बेटे इमरान अबुल हसन खान कांग्रेस से प्रत्याशी है और इस बार भी वंचित समाज इनकी तरफ ही जाते हुए लग रहा है एवं मुस्लिम मतदाताओं में भी अच्छी खासी पैठ है जो ऊबाठा-मनसे से उम्मीदवार इरशाद नबी सय्यद का खेल बिगाड़ सकते है जो पिछले चुनाव में AIMIM से दूसरे नंबर पर थे जो दिखता है कि मुस्लिम मतदाताओं में इनकी पकड़ कितनी मजबूत है और इस बार वे ऊबाठा-मनसे के प्रत्याशी हैं तो इस विभाग के कट्टर ठाकरे समर्थको का वोट भी इनको मिलेगा इसलिए लोगो का कहना है कि यदि सर्व समाज का वोट सही से कटता है तो इनकी लॉटरी लग सकती है तथा इनके एक और प्रतिद्वंदी सबर आलम AIMIM से चुनाव मैदान में है जिनके बारे में क्षेत्र में कहा जाता है कि यह काफी शांत और हसमुख स्वभाव के हैं और बताया जाता है कि इस विभाग में AIMIM का पारंपरिक वोट इनको मिलेगा ही और साथ ही इनके छोटे भाई एडवोकेट कुतुब आलम शाह जो राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार ) में है, जिनका प्रभाव 3 नंबर खाड़ी में नेताजी नगर और सरवर होटल के आस-पास के मुस्लिम बस्तियों में काफी ज्यादा है जिससे उनके भाई और AIMIM से प्रत्याशी सबर आलम को यहां से बढ़त भी मिल सकती है।
प्रभाग क्रमांक 161 में एक और प्रत्याशी समाजवादी पार्टी से अजमल जमाल खान है और इनके पिताजी जमाल खान है जिनके बारे में कहा जाता है कि किसी भी प्रकार के हर चुनाव में सपा से टिकट लेने के लिए सपा ने इनका पेटेंट कर लिया है हालांकि हर चुनाव में वे अपने हिसाब से संतोषप्रद वोट भी लेकर आते है लेकिन इस बार कई मुस्लिम मतदाताओं से बात करने पर लग रहा है कि वे सपा से दूरी बना रहे है और यहां के राजनीतिक हलकों में कहा जाता है कि यदि इस बार सपा किसी दमदार उत्तरभारतीय को टिकट देती तो उसको फायदा हो सकता था।
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