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162 में मत विभाजन की संभावना कम पुराने चेहरे की संभावना ज्यादा
मुंबई:
मुंबई महानगर पालिका का चुनाव प्रचार का तपन अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है जिसकी गर्माहट चांदिवली विधानसभा के प्रभाग क्रमांक 162 में देखी जा रही है जहां अप्रत्यक्ष तौर पर दो आमदारो की लड़ाई बताई जा रही है जिसमे पूर्व आमदार मो. आरिफ नसीम खान अपने बेटे मो.अमिर नसीम खान को चुनाव मैदान में उतारा है एवं दूसरी तरफ कांग्रेस से ही पूर्व नगरसेवक वाजिद कुरैशी जो अब शिंदे शिवसेना से चुनाव मैदान में डटे हुए हैं जिनको जिताने के लिए चांदिवली विधानसभा के विद्यमान आमदार दिलीप मामा लांडे भरपूर प्रयास में लगे हुए हैं और इस प्रभाग में इन दोनों ही उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर बताई जा रही है तथा दमखम रखनेवाले इन दोनों प्रत्याशियों के अलावा उबाठा से प्रत्याशी अन्नामलाई भी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश कर रहे है लेकिन कांग्रेस और शिंदे शिवसेना के उम्मीदवारों के मुकाबले अन्नामलाई के चुनाव प्रचार में थोड़ी सुस्ती बताई जा रही है।
दूसरी तरफ इस प्रभाग में अपक्ष उम्मीदवारों की एक लंबी फेहरिस्त है और इनमे खास बात यह है कि ज्यादातर सभी सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर रहते है लेकिन अपने क्षेत्र में कुछ अपक्ष उम्मीदवारों की पकड़ काफी मजबूत है जिसमे बीजेपी के कभी कार्यकर्ता रहे अपक्ष उम्मीदवार जितेंद्र गायकवाड़ का प्रभाव शांति नगर, समिता कॉम्प्लेक्स और तानाजी नगर जैसे क्षेत्रो में मजबूत है तथा इस प्रभाग के बीजेपी के एक और कद्दावर नेता राजन गुप्ता इस चुनाव में अपक्ष उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहे है जिनमे आत्मविश्वास तो बहुत है लेकिन प्रभाग के आम मतदाताओं का विश्वास जितने में कड़ी मशक्क्त करनी पड़ेगी। प्रभाग क्रमांक 162 में एक और सक्षम अपक्ष उम्मीदवार सुमित बारस्कर जो कुछ दिनों पहले कांग्रेस में ही थे लेकिन कांग्रेस से मो. अमिर नसीम खान को टिकट मिलने पर वे अपक्ष चुनाव लड़ रहे है चूंकि सुमित बारस्कर पहले मनसे से भी चुनाव लड़े थे और कांग्रेस पार्टी के माध्यम से काफी समाज कार्य किया था इसलिए सत्यनगर और जरीमरी के भागों में इनका प्रभाव देखा जा सकता है लेकिन यह प्रभाव वोट में परिवर्तित कितना हो पायेगा यह तो आनेवाला समय ही बताएगा।
प्रभाग 162 के आम मतदाता जिनका राजनीति से कुछ लेना-देना नहीं है उनके विचार से ऐसा लग रहा है कि मराठी - अमराठी हिंदू पट्टे में विद्यमान आमदार का प्रभाव आम जनमानस पर ज्यादा है जो शिंदे शिवसेना के उम्मीदवार वाजिद कुरैशी के लिए बहुत फायदेमंद होगा और वाजिद कुरैशी ने अपने कार्यकाल में जरीमरी में सबसे ज्यादा काम किया था तथा विद्यमान आमदार दिलीप मामा लांडे की भी पैठ मुस्लिम मतदाताओं में अच्छी खासी है जिससे वहां के मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में साथ देने की बात कर रहे हैं जो वाजिद कुरैशी की जीत में बड़ी सहायक हो सकती है और वहीं मुख्य प्रतिद्वंदी मो.अमिर नसीम खान को सबसे ज्यादा फायदा उनके पिता के नाम से मिलेगा ही जिसमे मुस्लिम मतदाता उनको बढ़ चढ़कर वोट करेगा यह तो जमीन पर दिखाई दे रहा है और साथ ही उनको हिंदी पट्टे के वोट के लिए मेहनत करनी पड़ सकती है।
बताया जा रहा है कि अपक्ष उम्मीदवार जितना भी वोट काटेंगे उसका फायदा सिर्फ और सिर्फ मो.अमिर नसीम खान को ही मिलेगा और यह तो तय है। वैसे असली राजनीतिक चाल तो 14 जनवरी को चला जाएगा उसके बाद ही पता चलेगा कि किसको शह मिल रही है या किसको मात।
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