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बेअदबी किया तो ₹25 लाख जुर्माने के साथ होगी उम्रकैद
पंजाब:
पंजाब में सिख धर्म के लोगों की भावनाएं आहत न हो और पंजाब में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए भगवंत मान सरकार ने धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा और समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है जिसके लिए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है जिसका मुख्य उद्देश्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वाले दोषियों को ऐसी सजा देना है जो मिसाल बन सके और राज्य में बेअदबी की घटनाओं पर लगाम लगाया जा सके जो पिछले एक दशक से बेअदबी की घटनाओं ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है बल्कि सिख समुदाय की भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंचाई है।
बेअदबी की घटना को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने जो खास नियम बनाए हैं उसके मुख्य बिंदु इस प्रकार है :
खास नियम:
- गंभीर अपराधों के लिए उम्रकैद।
- ₹25 लाख तक का जुर्माना।
- मामलों की जांच DSP रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी करेंगे।
- ऐसे मामलों में मानसिक बीमारी का बचाव नहीं होगा।
- दूसरों के जरिए बेअदबी करवाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
कानून का दायरा:
- खास तौर पर गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों पर लागू होता है।
- यह कानून अन्य धार्मिक ग्रंथों पर लागू नहीं होगा।
कुछ कानूनी जानकारों का मानना है कि इस कानून से कुछ समस्याएं पैदा कर सकती हैं जैसे कि पहला Article 254 के तहत संवैधानिक और केंद्र-राज्य में टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। दूसरा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 ‘कानून के समक्ष समानता’ की बात करता है और यह विधेयक केंद्र सरकार के पिछले 2025 के बिल से ठीक उल्टा है क्योंकि यह नया विधेयक विशेष रूप से केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी पर केंद्रित है और अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों को इसमें शामिल नहीं किया गया तो इस मुद्दे पर अदालत में चुनौती या बहस हो सकती है। तीसरा भारत में जमानत का नियम है और जेल कुछ-कुछ मामलों में अपवाद है तो ऐसे में पूरी तरह से जमानत पर रोक लगाना मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के नजरिए से समीक्षा का विषय बन सकता है। चौथा कि जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक के नए नियम के अनुसार जुर्माने की भारी राशि ₹25 लाख रुपये तय की गई है जिसकी वसूली करना भी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी और खासकर उन मामलों में जहां दोषी आर्थिक रूप से सक्षम न हो।
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