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डिजिटल क्रांति का बादशाह बना UPI
UPI ने जिस रफ्तार से दुनिया को पीछे छोड़ा है, वो दिखाता है कि टेक्नोलॉजी अपनाने में भारत अब अग्रणी भूमिका निभा रहा है और अब यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक व्यवहारिक क्रांति है, जहाँ विकसित देशों में कार्ड्स का दबदबा था और उस दबदबे को ख़त्म करने के लिए भारत ने सीधे मोबाइल-टू-मोबाइल (A2A) मॉडल अपनाकर कार्ड्स के कुचक्र को धराशायी कर दिया और साथ ही एक झटके में पूरी यंत्रणा ही बदल दिया जिसमे आज एक चाय वाले से लेकर शोरूम तक लगभग सभी लोग UPI से भुगतान करते हैं जिससे UPI ने 'Visa & Mastercard' के दशकों पुराने साम्राज्य को चुनौती ही नहीं दिया बल्कि उनके एक बहुत बड़े मार्केट को अपनी तरफ पूरी तरह खींच लिया जो भारत के लिए एक गर्व का क्षण है।
वैसे वीजा और मास्टरकार्ड को मूल्य के आधार पर तुलना करें तो वह हावी हैं, एकीकृत भुगतान इंटरफेस वॉल्यूम में भी भरी अंतर है लेकिन यूपीआई यह साबित करता है कि कम लागत वाली प्रणालियां बड़े पैमाने पर जीत सकती हैं जिसमे यूपीआई की सफलता हर जगह दिखाई दे रही है क्योंकि वित्तीय वर्ष 2026 में UPI लेनदेन का मूल्य ₹230 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है, जबकि डेबिट कार्ड की प्रासंगिकता कम हो रही है और UPI-ऑन-क्रेडिट कार्ड ने पारंपरिक कार्डों को पीछे छोड़ दिया है।
भारत का यूपीआई वीजा और मास्टरकार्ड की तुलना में अधिक दैनिक लेनदेन को वैश्विक रूप से मात्रा के आधार पर संसाधित करता है क्योंकि UPI सीधे बैंक खाते से मोबाइल के जरिए तुरंत ट्रांसफर करता है (IMPS), जबकि कार्ड चिप/स्वाइप के जरिए POS मशीन पर काम करते हैं जिसमे POS मशीन के पास जाने में समय लगता है।
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