नासिक /महाराष्ट्र:
महाराष्ट्र के पावन तीर्थ स्थल त्र्यंबकेश्वर में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच धर्म ध्वजा फहराकर सिंहस्थ महाकुंभ का आधिकारिक शुभारंभ हो गया है. सिंह राशि में बृहस्पति के प्रवेश करने के इस पवित्र अवसर पर त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधिवत पूजा-अर्चना कर धर्म ध्वजारोहण किया. इसी पावन घड़ी में नासिक के रामकुंड में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा मुख्य ध्वज फहराया गया।
आयोजन की मुख्य बातें:
- शुभ मुहूर्त पर शंखनाद: दोपहर ठीक 12 बजकर 2 मिनट के अभिजीत मुहूर्त पर कुशावर्त तीर्थ में गोदा पूजा के बाद मुख्य ध्वज फहराया गया।
- संतों की गरिमामयी उपस्थिति: इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए जगद्गुरु श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र पुरी और जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरि सहित विभिन्न अखाड़ों के सैकड़ों साधु-संत व महामंडलेश्वर उपस्थित रहे।
- संस्कृति का प्रतीक: सिंहस्थ महाकुंभ का यह धर्मध्वज भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत, संत परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है. 50 फीट से ऊंचे इस ध्वज पर अंकित सूर्य, चंद्र और सिंह के प्रतीक ब्रह्मांडीय निरंतरता और धर्म की रक्षा को दर्शाते हैं।
श्री श्रृंगेरी पीठ के पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य श्री विदुशेखर भारती महास्वामी जी के दिव्य उपस्थिति में, वेद मंत्रों के ब्रह्मनाद के बीच जब धर्मध्वज ने आकाश को स्पर्श किया, तब हर हृदय में एक ही उद्घोष गूंज रहा था - हर हर महादेव एवं ध्वजारोहण के संपन्न होते ही पूरा त्र्यंबकेश्वर परिसर 'हर हर महादेव' और 'जय श्री राम' के जयकारों से गूंज उठा. इस भव्य शुरुआत के साथ ही अब देश-विदेश से आने वाले अखाड़ों, नागा साधुओं और करोड़ों श्रद्धालुओं के पावन स्नान का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जो आगामी महीनों तक निरंतर चलता रहेगा।
इस पवित्र आयोजन के अवसर पर आदिवासी समुदाय ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Guinness World Records) में दर्ज करा लिया है। यहाँ पवित्र गोदावरी नदी के तट पर आदिवासी समुदाय के कुल 6,233 सदस्यों ने एक साथ गोदावरी आरती में भाग लिया। इस दौरान एक साथ 500 से अधिक शंख बजाकर महाआरती की गई, जिसे गिनीज बुक द्वारा विश्व रिकॉर्ड के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई है।
मुख्य आकर्षण और रिकॉर्ड के मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक भागीदारी: इस भव्य आयोजन में आदिवासी समुदाय के कुल 6,233 भाई-बहनों ने पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया।
- शंखनाद का रिकॉर्ड: आरती के दौरान एक ही समय पर 500 से ज्यादा लोगों द्वारा शंख बजाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।
- सांस्कृतिक गौरव: इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाया, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और एकता को भी वैश्विक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में इस रिकॉर्ड को दर्ज किया गया और आयोजन की समाप्ति पर इसका आधिकारिक प्रमाण पत्र भी सौंपा गया और शंखों की दिव्य गूंज और हजारों दीपों की रोशनी से पूरा गोदावरी तट अध्यात्म के रंग में सराबोर नजर आया।
ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अत्यंत ख़ुशी जताते हुए कहा कि बधाई हो महाराष्ट्र, मेरे लिए यह अविस्मरणीय, अलौकिक और दिव्य क्षण है एवं नाशिक-त्र्यंबकेश्वर की सनातन भूमि पर, माँ गोदावरी के जयघोष, शंखनाद की पवित्र ध्वनि और हजारों श्रद्धालुओं की साक्षी में सनातन का भगवा धर्मध्वज फहराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जो मेरे जीवन का स्वर्णिम क्षण है और यह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि युगों-युगों की आस्था का जागरण है इसलिए त्र्यंबकेश्वर महादेव की कृपा से प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिवतत्व जागृत हो, यही प्रार्थना है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि महाराष्ट्र उद्योग भूमि है। देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में महाराष्ट्र का योगदान लगभग 15 प्रतिशत है। भारत आज विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस सफलता के पीछे महाराष्ट्र का बहुत बड़ा योगदान है।
इस भव्य और दिव्य आयोजन के समय महाराष्ट्र के तमाम दिग्गज मंत्री और नेतागण उपस्थित थे।