नई दिल्ली:
नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में भारत निर्वाचन आयोग की बैठक हुई जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की मौजूदगी में कई अहम सवालों पर विस्तार से जवाब दिया गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रही अफवाहों एवं विरोध पर भी खुलकर चर्चा हुई और मीडिया का जवाब दिया गया।
चुनाव आयुक्त द्वारा बताए गए मुख्य बिंदु :
- 1. SIR कोई CEC का अकेला प्रोजेक्ट नहीं था एवं 24 जून, 2025 का SIR ऑर्डर और उसके बाद के शेड्यूल को पूरे कमीशन ने एकमत से मंज़ूरी दी थी।
- 2. FORM 6 को मनमाने ढंग से दोबारा नहीं लिखा गया था जिसमे चुनाव आयोग का कहना है कि Form 6 के साथ अटैच SIR डिक्लेरेशन को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है इसलिए SIR के बाहर, कानूनी फ़ॉर्म लागू होते रहेंगे।
- 3. 97 GOA केस 97 परमानेंटली “चोरी” हुए वोट नहीं हैं बल्कि चुनाव आयोग का कहना है कि प्रभावित मतदाताओं के लिए BLO भेज दिए गए हैं जो 97 में से 81 ने पहले ही Form भर दिया है और जो लोग छूट गए हैं, वे भी लगातार अपडेट के ज़रिए शामिल होने की मांग कर सकते हैं।
- 4. ECINET को बिना जांच किए छोड़ा नहीं जा रहा है और एक सीनियर DEC की अगुवाई वाली एक कमेटी, जिसमें एक इंडिपेंडेंट IIT/IIIT एक्सपर्ट होगा, यह समीक्षा करेगी कि सिस्टम चुनावी कानून का पालन करता है या नहीं।
- 5. विवादित IT ऑर्डर लागू नहीं किए गए। ECI का कहना है कि IT डिवीजन पर DEC की निगरानी कभी वापस नहीं ली गई।
- 6. प्रोसेस खुला है। हेल्प डेस्क, स्पेशल कैंप, घर-घर जाकर मिलना और ऑनलाइन सुनवाई की जा रही है, जबकि जो वोटर छूट गए हैं वे शामिल होने की मांग कर सकते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि कुछ मीडिया समूहों ने जो तीनो चुनाव आयुक्त में मतभेद होने का भ्रम पैदा करने की कोशिश की थी उसका जवाब तीनो चुनाव आयुक्त एक फ्रेम में आकर तो दे दिया लेकिन विपक्ष द्वारा लगाया गया “वोट चोरी” का आरोप बेबुनियाद है या सही है इसका जवाब शायद समय ही दे पाएगा।