Today Wednesday, 25 March 2026

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​"ORSL आपकी सेहत बिगाड़ देगा " बताने पर डॉक्टर को धमकी वाली नोटिस


हैदराबाद:
जो काम FSSAI  को करना चाहिए वह काम हेल्थ एक्टिविस्ट या कुछ डॉक्टर्स कर रहे है और FSSAI  को भारत के नागरिको के सेहत की कभी चिंता नहीं रहती बल्कि फार्मा हो या फ़ूड कंपनी सभी अपने मनमानी तरीके से खाना और दवा परोस रहें है, उन्हें किसीकी भी चिंता नहीं रहती है अब इस क्रम के ताजा मामला सामने आया है जिसमे हैदराबाद की मशहूर  बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शिवरंजनी संतोष को डराने और उनका मुहं बंद रखने के लिए उन्हें कुछ फार्मा कंपनियों ने धमकी के रूप में मानहानि का नोटिस भेजा है क्योंकि पिछले कई महीने से डॉक्टर शिवरंजनी संतोष ने सोशल मीडिया से लेकर हर जगह भारत के नागरिको के सेहत से खिलवाड़ करने वाली ORS जूस के बारे में सच्चाई बता रही थी कि किस प्रकार बड़े ब्रांड चमकदार फलों की छवियों के साथ शर्करा युक्त पेय/जूस बेचते हैं, लोगों को गुमराह एवं बीमार करते हैं जो बढ़ते मधुमेह और ख़राब जीवन शैली के मुद्दों को बढ़ावा देते हैं और विशेष रूप से बच्चों के सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा और काम उम्र में ही वे किसी न किसी गंभीर बीमारी के चपेट में आ जाएंगे।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शिवरंजनी संतोष, जिनकी पिछले आठ साल की लड़ाई के परिणामस्वरूप FSSAI द्वारा ORS लेबलिंग एवं नियमों में एक अहम रेगुलेटरी बदलाव किया गया और देश भर में नकली ORS की सच्चाई सामने आने से हो रही फजीहत को दबाने के लिए फार्मा कंपनी जॉन्सन ऐंड जॉन्सन और केनव्यू (KENVUE ) ने डॉक्टर शिवरंजनी को नोटिस भेजा और साथ ही उनके ब्रांड ORSL और ERZL के नामों को बदनाम करने के लिए माफ़ी मांगने के भी मांग किया जिसके कारण डॉक्टर शिवरंजनी ने देश के बच्चो के सेहत से खिलवाड़ करने वाले इन कप्म्पनियों के खिलाफ बिफर पड़ीं और कहा कि इनकी हिम्मत कैसे हुई मुझे यह नोटिस भेजने की जो दिन दहाड़े उत्पादों पर लगे भ्रामक ORS लेबल ताजे फलों के चित्र लगाकर देश के भोले भाले लोगो को बेचकर मुनाफा कमा रहे है और उनके सेहत से खिलवाड़ भी कर रहे हैं तथा उन्होंने कि मेरा पक्ष 14 और 15 अक्टूबर के FSSAI के आदेश से पहले का है और उस आदेश से सही साबित भी हो चुका है। दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ़ तौर पर स्टे देने से इनकार कर दिया है और यह कहना कि ERZL, ORSL का ही नया रूप है, बैन के आदेश का साफ़ उल्लंघन है और उन लोगों को गुमराह कर रहा है जो अब भी यह मानते हैं कि ORSL ही ORS है इसलिए आपके नोटिस पर हमारे वकील काम कर रहे हैं और वे ही इसे संभालेंगे और वैसे भी खाद्य उद्योग संघों को आमंत्रित करना पूरी तरह से अस्वीकार्य रहता है जिसमें चिप्स बनाने वाला, बिस्किट बनाने वाला या सॉसेज बनाने वालों में से कौन-सा निर्माता इस बात पर राज़ी होगा कि उनके उत्पादों के पैकेट के सामने ही ऐसा लेबल लगाया जाए जो उपभोक्ताओं को यह चेतावनी दे कि उनके उत्पादों में नमक, चीनी या सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत ज्यादा है?  

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अक्टूबर 2025 में जारी एक आदेश में कहा कि कोई भी फ़ूड ब्रांड 'ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट्स' या 'ORS' शब्द का इस्तेमाल तब तक नहीं कर सकता, जब तक कि उसका फार्मूला विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा सुझाए गए मानकों का पूरी तरह से पालन न करता हो और जब इस कानून का पालन न होता देख और भ्रामक उत्पादों से हो रहे सेहत के नुकसान को देखते हुए डॉक्टर शिवरंजनी ने इसके  उठाई और उसके बाद 16 मार्च के एक 'सीज़ एंड डेसिस्ट' (रोक लगाने वाले) नोटिस में आरोप लगाया गया है कि डॉक्टर शिवरंजनी ने सोशल मीडिया पर उत्पादों के बारे में मानहानिकारक बयान दिए हैं, जिनमें ORSL और उसका नया ब्रांडेड रूप ERZL शामिल हैं। नोटिस में कहा गया है कि ये कंपनियां विज्ञान-आधारित हैं और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 का पालन करती हैं। इसमें ज़ोर देकर कहा गया है कि उनके दावों के पीछे वैज्ञानिक प्रमाण और रेगुलेटरी मंज़ूरी मौजूद है। चल रहे रेगुलेटरी और कानूनी घटनाक्रमों का ज़िक्र करते हुए, नोटिस में दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि विचाराधीन उत्पाद 'मिलावटी या इस्तेमाल के लिए असुरक्षित नहीं' थे, और यह विवाद केवल ब्रांडिंग से जुड़े पहलुओं तक ही सीमित था। नोटिस में उन दावों को खारिज किया गया है कि पुराने ORSL उत्पाद अभी भी बेचे जा रहे हैं, या ERZL को ORS के विकल्प के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि वितरकों को FSSAI के निर्देशों का पालन करते हुए पुराने स्टॉक को वापस करने या उन पर नए लेबल लगाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन डॉक्टर शिवरंजनी ने कानूनी नोटिस पर  ही सवाल उठाए और तर्क दिया कि ERZL को ORSL के एक नए रूप के तौर पर पेश करना रेगुलेटरी निर्देश का उल्लंघन है और इससे उन माता-पिता में भ्रम पैदा हो सकता है जो पहले ORSL को ORS से जोड़कर देखते थे। 

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