दिल्ली:
RBI ने परिवर्तनीय दर रेपो नीलामी के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में ₹79256 करोड़ रु.डाले, जिससे नकदी प्रवाह की स्थिति में सुधार हुआ। रिजर्व बैंक ने कहा है कि नकदी 5.26% की औसत दर पर डाली गई। बैंकिंग प्रणाली में 23 मार्च तक नगदी प्रवाह की कमी लगभग ₹65395 करोड़ रु. होने का अनुमान है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने महंगाई को काबू में रखने के लिए रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखा है, साथ ही डिजिटल लेंडिंग के नियमों को और मजबूत किया है और इंश्योरेंस बेचने के लिए थर्ड-पार्टी इंसेंटिव पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है। मुख्य ज़ोर लगातार ग्रोथ और डिजिटल धोखाधड़ी से ग्राहकों की सुरक्षा पर बना हुआ है।
हाल के मुख्य घटनाक्रम:
- मौद्रिक नीति (फरवरी 2026): MPC ने सर्वसम्मति से पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया, जिसमें स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.5% तय किया गया।
- डिजिटल लेंडिंग और धोखाधड़ी की रोकथाम (मार्च 2026): डिजिटल लेंडिंग ऐप्स के लिए रेगुलेटरी ढांचे को और सख्त बनाने और धोखाधड़ी वाले लोन ऐप्स से ग्राहकों को बचाने के लिए साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए नए नियम जारी किए गए हैं।
- उपभोक्ता संरक्षण: प्रस्तावों में बैंक कर्मचारियों को थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स (जैसे इंश्योरेंस/म्यूचुअल फंड) बेचने के लिए इंसेंटिव देने पर रोक लगाना और कर्ज वसूली के अनैतिक तरीकों के खिलाफ सख्त नियम बनाना शामिल है, जो 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।
- RBI प्रशासन: सेंट्रल बोर्ड ने 2026-27 के बजट और 2026-29 के रेगुलेटरी रणनीति ढांचे (उत्कर्ष 3.0) को मंज़ूरी दे दी है।
- रेगुलेटरी जुर्माना: RBI ने मार्च 2026 में नियमों का पालन न करने के लिए कई सहकारी बैंकों पर जुर्माना लगाया है।