Today Monday, 30 March 2026

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जीवन का गहरा सीख दे गए विजयपत सिंघानिया


मुंबई :
कपड़ा कारोबार से जुड़े रेमंड समूह के पूर्व अध्यक्ष विजयपत सिंघानिया का कल मुंबई में निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे एवं उनके पुत्र और समूह के वर्तमान अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दिया। पद्म भूषण से सम्मानित विजयपत सिंघानिया एक विमान चालक भी थे और उन्होंने हॉट एयर बैलून में सबसे अधिक ऊंचाई हासिल करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था, उनके निधन से उद्योग जगत में शोक की लहर है. उनका निधन भारत के सबसे प्रमुख औद्योगिक परिवारों में से एक के लिए एक युग के अंत का प्रतीक है, वह न केवल एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि एक साहसी और जुनूनी विमान चालक के रूप में भी जाने जाते थे, उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए और विमानन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित किया था, उन्हें भारतीय उद्योग जगत के एक दिग्गज और दूरदर्शी नेतृत्व के रूप में जाना जाता है।
 
विजयपत सिंघानिया की कहानी में एक शांत, लेकिन गहरा सबक छिपा है। एक ऐसा इंसान जिसने 12000 करोड़ का एक साम्राज्य खड़ा किया और कहा जाता है कि एक समय वह मुकेश अंबानी से भी ज़्यादा अमीर थे और 2015 में, उन्होंने रेमंड में अपनी पूरी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने बेटे गौतम को दे दिया जिसकी कीमत लगभग 1,000 करोड़ रुपये थी और यहीं से उन्होंने अपनी ही ज़िंदगी पर से अपना नियंत्रण खो देने की बात कही थी। उनके यह शब्द हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर देंगे कि जिसमे उन्होंने कहा “आप प्यार से अपनी संपत्ति, शेयर और दूसरी चीज़ें बच्चों को तोहफ़े में दे सकते हैं, लेकिन सबसे पहले अपनी सुरक्षा पक्की करें।”

क्योंकि यह सिर्फ़ दौलत की बात नहीं है, बल्कि बुढ़ापे में अपनी गरिमा, आज़ादी और आत्म-सम्मान बनाए रखने की बात है। बच्चों से प्यार करना स्वाभाविक है और उनके लिए त्याग करना हमारी फितरत में होता है। लेकिन, अपनी सारी आर्थिक बागडोर पूरी तरह से किसी और के हाथों में सौंप देने का नतीजा कभी-कभी इतना भारी पड़ सकता है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होती और हम अपने बच्चों के भविष्य की तो पूरी योजना बनाते हैं, लेकिन अक्सर अपने खुद के भविष्य को सुरक्षित करना भूल जाते हैं।

सीख:
  •  प्यार से दें, लेकिन अपनी आज़ादी की कीमत पर नहीं।
  •  अपने बच्चों का ख़्याल रखें, लेकिन खुद को बेसहारा या कमजोर न छोड़ें।
  •  क्योंकि आखिर में, आर्थिक सुरक्षा का मतलब सिर्फ़ पैसा होना ही नहीं है, बल्कि अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिन पूरी गरिमा और सम्मान के साथ बिताना है।

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