Today Monday, 23 March 2026

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​दुनिया की पहली पसंद बनी भारतीय दवाएं


मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के तौर पर, भारत की दवाएँ अब घरेलू उत्पादन से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक अपनी एक अलग ताकत के तौर पर उभरकर सामने आया है जो 'दुनिया की फार्मेसी' के तौर पर भारत की स्थिति, किफायती कीमतों और पक्की गुणवत्ता के अनोखे मेल पर आधारित है; इसी वजह से भारतीय दवाएँ दुनिया भर के बाजारों में बहुत पसंद की जाती हैं। भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग, मात्रा के हिसाब से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य के हिसाब से 11वां सबसे बड़ा उद्योग उभरकर सामने आया है और आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 25 में इस क्षेत्र का सालाना कारोबार ₹4.72 लाख करोड़ तक पहुँच गया, पिछले एक दशक (वित्त वर्ष 15 से वित्त वर्ष 25) के दौरान निर्यात में 7% की CAGR (यौगिक वार्षिक वृद्धि दर) से बढ़ोतरी हुई है और साथ ही भारत जेनेरिक दवाओं का दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर भी है जो दुनिया की कुल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा पूरा करता है और 60 अलग-अलग इलाज श्रेणियों में लगभग 60,000 जेनेरिक ब्रांड बनाता है जिससे फार्मा निर्यात का आंकड़ा USD 30.5 बिलियन रहा, जो 2000-01 के USD 1.9 मिलियन के मुकाबले लगभग 16 गुना ज्यादा है।

वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में भारत का फार्मास्यूटिकल क्षेत्र का योगदान :
  • भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग मात्रा के हिसाब से वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा और मूल्य के हिसाब से 11वां सबसे बड़ा उद्योग है।
  • घरेलू बाज़ार का आकार 60 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिसके 2030 तक 130 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
  • फार्मा क्षेत्र का वार्षिक कारोबार वित्त वर्ष 25 में 4.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
  • मूल्य के आधार पर, भारत वर्तमान में फार्मास्यूटिकल निर्यात में वैश्विक स्तर पर 11वें स्थान पर है, और वर्ष 2024-25 में इसने 191 देशों को निर्यात किया।
  •  निर्यात 30.5 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो 2000-01 के 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर की तुलना में लगभग 16 गुना अधिक है।
  • वर्ष 2025-26 में (अप्रैल-सितंबर) के दौरान एफडीआई में 13,193 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
  •  केंद्रीय बजट 2026-27 में, भारत को वैश्विक बायोफार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए 'बायोफार्मा शक्ति' का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके लिए अगले पांच वर्षों में कुल 10,000 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया हैptive द्वारा बनाया गया एक पूरी तरह से ऑटोनॉमस (स्वचालित) AI-पावर्ड रोबोटिक डेंटिस्ट ने एक इंसान मरीज़ पर सिर्फ 15 मिनट में पूरा क्राउन तैयार करने का काम पूरा कर दिया।





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