दिल्ली :
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में अब धीरे धीरे ही सही लेकिन क्रांतिकारी बदलाव देखा जा रहा है, जिस प्रकार से देश में मधुमेह एवं मोटापा की बीमारी भी बेतहासा बढ़ रही है, यह दोनों बिमारियों से क्या आमिर और क्या गरीब कोई भी अछूता नहीं है बल्कि ज्यादातर लोग ग्रसित ही हैं और इन बिमारियों से इंसान तो परेशा रहता ही है लेकिन सबसे बड़ी तकलीफ इनसे संबंधित दवाओं का खर्च उठाना भी सबसे ज्यादा परेशानी का कारण रहता है जिससे आम लोगो के घरों का बजट भी बिगड़ता रहता है क्यूंकि इस प्रकार की दवाएं बाजार में काफी महंगी मिलती है लेकिन अब भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं में भरी बदलाव आ रहा है और इस बिमारियों में सबसे बड़ी भूमिका सेमाग्लूटाइड का रहता है और इसके लिए 40 से अधिक कंपनियां ने इसका 50 से अधिक जेनेरिक संस्करण तैयार किया है जिससे दुनिया की सबसे लोकप्रिय मधुमेह और वजन घटाने की दवा अब लाखों भारतीयों के लिए सस्ती हो गई है।
Novo Nordisk दवा के पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने के बाद अब भारतीय दवा बाजार में फार्मा की बड़ी कंपनियों में फ़ार्मा जंग भी शुरू हो गई है जिसमे नैटको फार्मा ने भारत में सेमाग्लूटाइड जेनेरिक इंजेक्शन की मल्टी-डोज शीशियां 1,290 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च करने के साथ में सेमाग्लूटाइड बाजार में हलचल मचा दी है, जिससे मधुमेह के इलाज में सामर्थ्य की नई परिभाषा सामने आई है और वहीं दूसरी तरफ़ मैनकाइंड फार्मा भी NovoNordisk दवा के पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने के बाद, भारत के सेमाग्लूटाइड बाजार में अग्रणी कंपनियों में से एक बनने की तैयारी कर रही है जिसके लिए कंपनी के वाइस चेयरमैन एंव मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव जुनेजा ने स्पष्ट रूप से कम प्रदर्शन को स्वीकार किया और सुधार की उम्मीद भी जताई है।
भारत में सेमाग्लूटाइड (डायबिटीज + वजन घटाना) अब सभी के लिए काफी सस्ते में उपलब्ध रहेगी जो अब ₹4,500/- महीना के मुकाबले ₹1,290/- महीना में मिलेगी और इस बारे में कुछ डॉक्टरों का कहना है कि इस फार्मा जंग में विजेता वह नहीं होगा जिसने सबसे पहले लॉन्च किया है बल्कि विजेता वह होगा जो सबसे तेजी से स्केल करे एवं डॉक्टरों पर जिसका ज्यादा अधिकार होगा और एक ही मॉलिक्यूल एक ही समय और अलग-अलग रणनीतियों में मुकाबला के बजाय कैटेगरी क्रिएशन है जिसमे Mass बनाम Premium ब्रांड होगा और साथ ही दवा का प्राइजिंग पॉवर और डिस्ट्रीब्यूशन स्केल भी काफी मायने होगा क्योंकि यह बीस से पचास हजार करोड़ का मार्किट है।
सेमाग्लूटाइड मॉलिक्यूल :
a. Novo Nordisk + Abbott → Premium (Ozempic)
b. Zydus + Lupin + Torrent → Distribution scale play
c. Natco + Eris → Aggressive price disruption
पद्मश्री से सम्मानित एवं जाने माने मधुमेह एक्सपर्ट डाॅ. डी. वी. मोहन का सेमाग्लूटाइड के बारे में सख्त निर्देश और विचार:
1. यह बहुत अच्छी बात है कि जेनेरिक वर्शन बहुत कम कीमत पर लॉन्च किए जा रहे हैं।
2. इससे यह और भी ज़्यादा लोगों तक पहुँच पाएगा।
3. गुणवत्ता महत्वपूर्ण है।
4. इसे केवल योग्य डॉक्टरों द्वारा ही सख्ती से निर्धारित किया जाना चाहिए।
5. इसका उपयोग केवल चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए, न कि सौंदर्य संबंधी उद्देश्यों के लिए।
6. हालाँकि ये बहुत प्रभावी और काफी सुरक्षित होते हैं, फिर भी इनके दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
7. अधिक भारतीय डेटा एकत्र करने की आवश्यकता है।
8. कड़ी फार्माकोविजिलेंस (दवा निगरानी) बनाए रखना अनिवार्य है।
9. भारत के पास एशिया, अफ्रीका आदि अन्य विकासशील देशों को कम कीमत पर यह दवा उपलब्ध कराने का एक बेहतरीन अवसर है।