जी हां , जो लोग कहते थे कि भारत की अर्थव्यवस्था एक डेड इकोनॉमी है आज अमूल ने उनके मुंह पर 1 ट्रिलियन रुपये का टर्नओवर करके जोरदार तमाचा मारा है और इसके साथ ही वह पहली भारतीय FMCG कंपनी बन गई है। हालांकि, यह माइलस्टोन ऐसे समय में आया है जब इंडियन FMCG में कंज्यूमर का भरोसा अब तक के सबसे निचले स्तर पर है और मसालों में हाल के पेस्टिसाइड स्कैंडल से लेकर दही और दूध में मिलावट तक के सफर में सभी इंडस्ट्री को 'वॉल्यूम फर्स्ट' से 'क्वालिटी फर्स्ट' की ओर बढ़ने की ज़रूरत है और जनता के हेल्थ सेफ्टी से कोई समझौता नहीं किया जा सके ऐसी सोच को हमेशा ध्यान में रखना होगा लेकिन अमूल की यह ग्रोथ बहुत अच्छी है, जो यह दिखाता है कि उसके उत्पादों पर ग्राहकों का कितना अटूट विश्वास है।
दूध से लेकर मक्खन और आइसक्रीम तक… अमूल ने एक ऐसा ब्रांड बनाया जो मूल रूप से घर-घर में मशहूर है, अमूल (Amul) ने इतिहास रचते हुए वित्त वर्ष 2025-26 (FY 26) में ₹1 लाख करोड़ (1 ट्रिलियन) से अधिक का टर्नओवर हासिल किया है और यह उपलब्धि पाने वाली वह भारत की पहली FMCG कंपनी बन गई है। यह ऐतिहासिक वृद्धि 3.6 मिलियन (36 लाख) डेयरी किसानों के सहकारी मॉडल, 1,200 से अधिक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला, और अमेरिका/यूरोप सहित वैश्विक बाजारों में विस्तार से प्रेरित है और अमूल का यह प्रदर्शन न केवल उसके उत्पादों (दूध, मक्खन, पनीर, आइसक्रीम) की घरेलू मांग को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक मजबूत डेयरी ब्रांड के रूप में इसकी बढ़ती पहचान की भी पुष्टि करता है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ऐतिहासिक टर्नओवर: ब्रांड अमूल ने वित्तीय वर्ष FY26 में ₹1 लाख करोड़ का कुल कारोबार किया।
- GCMMF का प्रदर्शन: अमूल की मार्केटिंग इकाई, गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF), ने 11.4% की वृद्धि के साथ ₹73,450 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया।
- सहकारी मॉडल की ताकत: यह सफलता देश के 36 लाख से अधिक किसानों की मेहनत और 31 मिलियन लीटर प्रतिदिन से अधिक दूध प्रसंस्करण (processing) पर टिकी है।
- उत्पाद और विस्तार: अमूल अब 50 से अधिक देशों में सक्रिय है, और अमेरिका, यूरोप के बाद अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी विस्तार कर रहा है।
- प्रतियोगिता: ₹1 लाख करोड़ के साथ, अमूल HUL, एग्री-टेक (AWL), और पतंजलि फूड्स जैसे अन्य बड़े FMCG खिलाड़ियों से आगे निकल गया है।