मदुरै, तमिलनाडु:
तमिलनाडु के मदुरै की एक अदालत ने 6 अप्रैल 2026 को साथानकुलम (Sathankulam) कस्टोडियल डेथ मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा (मौत की सजा) सुनाई है, ऐसा फैसला सुनते ही पूरा देश हैरान हो गया लेकिन जब इन सजा पाए पुलिस वालों की बर्बरता के बारे में सुनकर लोगों ने अदालत के इस फैसले की प्रशंसा करने लगे क्योंकि बात उस समय की है जब साल 2020 में पूरा देश कोविड के महामारी के कारण लॉकडाउन से गुजर रहा था, उस समय तमिलनाडु के साथानकुलम में 60 वर्षीय जयराज मोबाइल की दुकान चलाते थे और लॉकडाउन में दुकान को शाम 5 बजे तक जल्दी बंद करने का नियम लागू था लेकिन अपनी माली हालत कमजोर होने के कारण जयराज दुकान को एक दो घंटे ज्यादा खुला रखते थे और दुकान को दो घंटे ज्यादा खुला रखने के एवज में वहां के पुलिस इंस्पेक्टर ने मुफ्त में मोबाइल फोन की मांग किया लेकिन जयराज ने मुफ्त में मोबाइल फोन देने से इंकार कर दिया और उस पुलिस वाले के जाने के बाद जयराज ने इंस्पेक्टर के बारे में कहा कि यह भ्रष्ट पुलिस वाला है, यह बात एक ऑटो रिक्शा चालक ने सुन लिया और जाकर पुलिस वालों को बता दिया फिर इसके बाद पुलिस ने जयराज को उठा लिया और पुलिस स्टेशन ले जाकर बदले की भावना से मारना पीटना शुरू किया और जब इस घटना की जानकारी मिलने के बाद जयराज का बेटा 31 वर्षीय बेनिक्स अपने पिता को बचाने पुलिस स्टेशन गया तो पुलिस ने बाप बेटे दोनों को लॉक-आप मे बंद कर बेरहमी से मारने पीटने लगे और इतना ही नहीं पुलिस वालों ने उनके मल द्वार में लाठी डंडे घुसा कर इतना टार्चर किया कि दीवारों पर खून के छीटें फैल गए और बड़ी बर्बरता से उनके अंडकोश पर भी लाठियों से मारा गया।
लॉकडाउन में कोर्ट बंद था तो मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के घर में दोनों को लाया गया तो दोनों चल भी नहीं पा रहे थे और पुलिस बबर्रतापूर्ण पिटाई से खून का रिसाव इतना ज्यादा था कि जयराज और बेनिक्स को कई लुंगी बदलनी पड़ी और जैसे तैसे उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने खड़ा किया गया और मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने भी दूर से देखकर दोनों को पुलिस कस्टडी में भेज दिया, फिर कुछ दिन बाद असहनीय पीड़ा से बाप बेटे दोनों की मौत हो गई और 6 साल बाद मदुरै की विशेष अदालत ने इस मामले को 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (rarest of rare) माना और सभी 9 पुलिसकर्मियों को हत्या का दोषी पाया और 9 पुलिस वालों को मौत की सजा सुनाया और साथ ही दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर बालकृष्णन और रघु गणेश, हेड कांस्टेबल मुरुगन और सामीदुरई, कांस्टेबल मुथुराज, सेल्लदुरई, थॉमस फ्रांसिस और वेलुमुथु शामिल हैं। अदालत ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है और पीड़ित परिवार को ₹1.40 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है जिसमे अदालत ने अकेले इंस्पेक्टर श्रीधर को ₹24 लाख रुपये देने का आदेश दिया और सब इंस्पेक्टर को ₹16.30 लाख रुपये देने का आदेश दिया है और अगर वे पैसे नहीं देते हैं तो कोर्ट उनकी प्रॉपर्टी जब्त कर लेगी और उन्हें बेच देगी।
जयराज की पत्नी एवं बेनिक्स की माँ सेल्वरानी ने जून 2020 में एक ही हफ़्ते में अपने पति और बेटे को खो दिया और 2192 दिनों तक वह कोर्ट के अंदर-बाहर घूमती रहीं लेकिन हार नहीं मानी और अदालत के इस फैसले से काफी भाव विभोर होकर कहने लगी कि अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले से मेरे पति एवं बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी और देश में ऐसी दर्दनाक घटना किसी दूसरे परिवार के साथ न हो इसलिए ऐसा सबक भी सभी बेलगाम पुलिसवालों को मिलना जरूरी था और मैं कोर्ट के फैसले से खुश हूँ।