Today Thursday, 02 April 2026

/ समाचार / राष्ट्रीय

​विदेशी फंडिंग पर होगी पैनी नजर


दिल्ली :
FCRA Amendment Bill 2026 भारत सरकार द्वारा विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले एनजीओ (NGOs) और संगठनों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए पेश किया गया है जिसका उद्देश्य विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है क्योंकि एक सीधा सा सवाल जेहन में यह आता है कि कई देश कर्ज में डूबे रहते है और उनके देशों में भी गरीबी रहती है लेकिन फिर भी वे देश या विदेशी व्यक्ति भारत के एनजीओ को ही क्यों पैसा देते हैं और उसका क्या स्वार्थ होता है, जाहिर सी बात है उसका स्वार्थ है धर्मांतरण को बढ़ावा देना है, चाहे वह इस्लामी धर्मांतरण हो, ईसाई मिशनरियों के द्वारा धर्मांतरण हो या फिर आतंकवाद को बढ़ावा देना चाहे जिसमें अभी कुछ दिनों पहले पूर्वोत्तर के राज्यों में अमेरिका और यूक्रेन के कई ख़ुफ़िया एजेंट्स पकड़े गए जो ईसाई मिशनरियों के साथ मिलकर कुकी या बोडो उग्रवाद में शामिल पाए गए जिनका प्रमुख उद्देश्य यह है कि इन राज्यों को भारत से कैसे तोडा जाए वह भी FCRA की फंडिंग से जो किसी न किसी एनजीओ के माध्यम से भारत में आते हैं। उसके अलावा विदेशी ताकतों का सबसे बड़ा यह स्वार्थ होता है कि भारत तरक्की ना करें और इसके लिए यह तमाम NGO को फंड देकर सरकारी परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करवाती हैं और इसके भुक्तभोगी UPA शासनकाल में खुद मनमोहन सिंह बन चुके हैं जब तमिलनाडु के न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ अमेरिका ने कई NGO को  पैसे देकर लोगों को भड़का दिया था और लंबे समय तक प्रदर्शन चला था जिसके बाद मनमोहन सरकार ने संसद में कहा कि हमें पुख्ता जानकारी मिली है कि इस प्रदर्शन के पीछे अमेरिका का हाथ है। 

अब FCRA Amendment Bill 2026 पेश करते समय सरकार का कहना है कि 16000 NGOs के माध्यम से 22000 करोड़ रुपए भारत में आते हैं तो इसलिए इतने बड़े पैसे का उपयोग कौन, कहां और कैसे कर रहा है इसकी जवाबदेही तो तय करनी ही पड़ेगी ताकि यह पैसा देश के खिलाफ इस्तेमाल न किया जा सके और सरकार का तर्क साफ है कि इस बिल से पारदर्शिता बढ़ेगी, राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और जिन NGOs को ऐसी फंडिंग मिल रही है उसके संपत्ति पर भी नज़र रखना ज़रूरी है एवं कोई कानून तोडा तो उसका FCRA लाइसेंस रद्द होन तय है और फंडिंग के दुरुपयोग का ताजा उदहारण अभी हाल में ही देखा गया जिसमे उत्तर प्रदेश का मौलाना छांगुर इस्लामी देशों से 100 करोड रुपए की विदेशी फंडिंग लेकर डेढ़ सौ से ज्यादा हिंदू लड़कियों को मुस्लिम बना दिया है। इस बिल से सबसे ज्यादा बौखलाहट दक्षिण भारत में है जो ज़्यादातर ईसाई धर्म अपनाने वाले लोगों में हैं जिनमे ज़्यादातर हिंदू पिछड़े वर्ग से हैं, जिन्हें चर्च के सपोर्ट वाले NGOs ने दशकों से विदेशी फंड बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करके धर्म बदलवाया है और खास बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में धर्म बदलने वाले लोग अभी भी हिंदू के तौर पर लिस्टेड हैं जो देश के ताने बाने को छिन्न भिन्न कर सकता है। NGOs ने इस पैसे का इस्तेमाल करके आंध्र प्रदेश, केरल, तेलंगाना और कर्नाटक में ज़मीन के बड़े-बड़े टुकड़े खरीदे हैं और बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है और जिसके कारण धर्म परिवर्तन और डेमोग्राफिक इम्बैलेंस भी बड़ी तेजी से फ़ैल रहा है जो आगे चलकर बड़े झगड़े का कारण बनेगा इसलिए यहां पर कांग्रेस और लेफ्ट ज्यादा दबाव में दिखाई दे रही है। 

आज संसद भवन में कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों ने इस बिल के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया और साथ ही केरल कैथोलिक बिशप परिषद के अध्यक्ष, कार्डिनल बेसेलिओस ने भी कहा कि इस एफसीआरए संशोधन विधेयक ने ईसाई समुदायों के बीच चिंता और दबाव पैदा कर दिया है इसलिए सरकार को इस बिल के बारे में पुनर्विचार करना चाहिए, कांग्रेस के वेणुगोपाल ने तो एक कदम आगे बढ़ाते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026,  अल्पसंख्यकों और एनजीओ के खिलाफ है और इसको 'काला कानून' करार दिया है, यह सुधार बिल नहीं बल्कि कंट्रोल बिल है जो  NGOs और अल्पसंख्यक संस्थाओं को निशाना बनाने के साथ साथ सिविल सोसायटी को भी दबाने की कोशिश की जाएगी। 

भारत सरकार के स्पष्ट रूख को देखते हुए साफ़ लग रहा है कि वह यह बिल संसद में हर हालत में पास कराएगी लेकिन वह भी पावर, नैरेटिव और इन्फ्लुएंस की चाल को समझते हुए फूँक-फूँक कर क़दम रख रही है। 


FCRA 2026 Bill की मुख्य विशेषताएं:

(1) संपत्ति जब्ती प्रावधान:
     अगर किसी NGO का FCRA लाइसेंस रद्द, निलंबित या समाप्त होता है तो सरकार विदेशी फंड से बनी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले सकती है। 

(2) अब प्रमुख पदाधिकारी स्पष्ट रूप से defined होंगे ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और जिम्मेदारी से बचने का रास्ता न रहे। 

(3)  विदेशी फंड्स के उपयोग पर सख्त निगरानी होगी यानी फंड  कहां से आया और कहां खर्च हुआ जिस पर  सबसे ज्यादा बारीक़ नजर राखी जाएगी। 

(4) दंड में भी बदलाव किया गया सजा 5 साल से घटाकर 1 साल करने का भी प्रस्ताव है। 

Related Articles

Designed & Maintained by Webxces

© 2025 | News WiFi