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जाकिर नाइक का प्रत्यर्पण नहीं होगा - मलेशिया
डिजिटल टीम :
मलेशिया की सरकार ने विवादित इस्लामिक प्रचारक डॉ. ज़ाकिर नाइक को भारत प्रत्यर्पित (Extradite) न करने का अपना फैसला दोहराया है। मलेशिया के गृहमंत्री सैफुद्दीन नासुतिओन इस्माइल ने संसद (दीवान रक्यात) में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि मलेशियाई सरकार ने ज़ाकिर नाइक को भारत को न सौंपने का निर्णय लिया है और उसे वापस भेजने को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है।
गृहमंत्री सैफुद्दीन नासुतिओन इस्माइल के इस बयान के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- भारत से कोई नया अनुरोध नहीं: गृहमंत्री ने बताया कि भारत सरकार की ओर से प्रत्यर्पण का एकमात्र आधिकारिक अनुरोध 19 जनवरी 2018 को मिला था, जिसे तब मलेशिया ने खारिज कर दिया था। इसके बाद 29 मई 2020 को भारत ने एक राजनयिक नोट भेजकर पुनर्विचार की मांग की थी, लेकिन तब से अब तक कोई नया अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।
- संधि और कानून का हवाला: मलेशियाई गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि नाइक को न सौंपने का यह फैसला भारत के साथ 2010 में हस्ताक्षरित प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 6 और मलेशिया के प्रत्यर्पण अधिनियम 1992 के तहत देश को मिले अधिकारों के आधार पर किया गया है।
मलेशिया में स्थायी निवास
ज़ाकिर नाइक साल 2016 से भारत से फरार होकर मलेशिया में रह रहा है, जहां उसे वहां की सरकार द्वारा स्थायी निवास (Permanent Residency) प्राप्त है।
भारत में वांछित है ज़ाकिर नाइक
गौरतलब है कि भारतीय जांच एजेंसियों (NIA और ED) को मनी लॉन्ड्रिंग, भड़काऊ भाषण देने और युवाओं को आतंकवाद के लिए उकसाने के मामलों में ज़ाकिर नाइक की तलाश है। भारत सरकार लगातार उसे वापस लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास करती रही है, लेकिन मलेशिया के इस ताजा रुख से भारत की प्रत्यर्पण की कोशिशों को एक बार फिर झटका लगा है
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