/ आपका प्रदेश / महाराष्ट्र
मुंबई में एक हरे भरे वृक्ष की भूख/प्यास से हुई मौत
मुंबई/महाराष्ट्र :
विकास की अंधी दौड़ में कांक्रीटीकरण के कारण मुंबई में एक हरे भरे वृक्ष की 'भूख और प्यास' से तड़पकर मौत हो गई है, ऊपरी तौर पर हरा-भरा दिखने वाला यह पेड़ वास्तव में पिछले कई महीनों से भीषण भुखमरी का सामना कर रहा था और भले हम इसको 'विकास के नाम पर की गई प्रशासनिक हत्या' करार दे सकते है लेकिन इस हत्या के जिम्मेदार हम भी हैं।
कंक्रीट/लादी के जाल में घुट रहा था दम
गोरेगाव पूर्व (रेलवे स्टेशन के पास ) में विश्वेश्वर नगर रोड पर स्थित इस हरे भरे पेड़ के तने के चारों ओर की मिट्टी को पूरी तरह से सीमेंट और लादी /टाइल्स से ढंक दिया गया था जबकि मनपा नियम के मुताबिक किसी भी पेड़ के मूल (जड़) के आसपास कम से कम एक मीटर का क्षेत्र खुला छोड़ना अनिवार्य है, ताकि उसे खाद, पानी और ऑक्सीजन मिल सके। लेकिन इस मामले में बिल्डिंग के रहवासियों ने पेड़ की जड़ों को कंक्रीट के आलावा लादी /टाइल्स से पूरी तरह से सील कर दिया था।
पानी और पोषक तत्वों की कमी बनी 'मौत' का कारण
कंक्रीट के आलावा लादी /टाइल्स की मोटी परत के कारण बारिश का पानी जमीन के नीचे जड़ों तक नहीं पहुंच पा रहा था जिसके कारण मिट्टी पूरी तरह से सूखी और बंजर हो चुकी थी, जिससे पेड़ को आवश्यक नाइट्रोजन, फास्फोरस और अन्य पोषक तत्व मिलना बंद हो गए और जड़ों को ऑक्सीजन न मिलने की वजह से वे अंदर ही अंदर सड़ने/सूखने लगीं। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी जीव का गला घोंटकर उसे खाना-पानी देना बंद कर दिया जाए और उसकी मौत हो जाए।
खोखला होकर अचानक गिरा, टला बड़ा हादसा
अंदरूनी भुखमरी के कारण कमजोर हो चुका यह हरा भरा पेड़ रविवार सुबह 11 बजे अचानक भरभराकर सड़क पर गिर गया और इस दौरान सड़क के किनारे खड़े 2 ऑटोरिक्शा और एक कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई एवं एक राह चलती महिला भी मामूली रूप से बाल बाल बची लेकिन राहत की बात यह रही कि रविवार सुबह होने के कारण वहां से ज्यादा वाहन/बाइक या राहगीर नहीं गुजर रहे थे जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। गौरतलब है कि मुंबई में इस साल कम मानसून एवं उसके बाद भी कंक्रीटीकरण और गलत वैज्ञानिक तरीकों से की गई छंटाई के कारण सैकड़ों पेड़ गिर चुके हैं, जिनमें कई नागरिकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है।
पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश
मुंबई के पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि "यह सिर्फ एक पेड़ का गिरना नहीं है, बल्कि हमारे सिस्टम की असंवेदनशीलता के कारण एक जीवित प्राणी की भूख से हुई मौत है। एक तरफ मुंबई में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) के लिए पहले ही हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, और जो बचे हैं, उन्हें हम कंक्रीट के नीचे दबाकर मार रहे हैं।"
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस हरे भरे वृक्ष की मौत के लिए ACME AMAY बिल्डिंग के सभी पदाधिकारियों के साथ साथ मनपा के P/SOUTH के गार्डन विभाग के ट्री अधिकारी पर Maharashtra (Urban Areas) Protection and Preservation of Trees Act, 1975 के तहत कार्यवाई के अलावा उनपर हत्या का मुक़दमा दर्ज होना चाहिए जिससे सभी को सबक मिले और वार्ड के संबंधित ठेकेदार के साथ साथ इसकी भी जाँच होनी चाहिए कि इस वृक्ष का ऑडिट किया गया था या नहीं, यदि नहीं तो इस सम्बन्ध में कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो सभी पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
Related Articles