DRDO भवन :
भारत अपना पहला राष्ट्रीय एयरो इंजन परीक्षण परिसर (NAETC) बनाने की दिशा में अग्रसर है जिससे रूस या विदेशी परीक्षण केंद्रों पर भारत की निर्भरता समाप्त करने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है। DRDO ने पूर्णतः एकीकृत एयरो-इंजन परीक्षण सुविधा के लिए RFI जारी किया है जो वर्तमान में उच्च ऊंचाई वाले इंजन परीक्षण के लिए रूस पर निर्भरता बना रहता है जिसके कारण देरी, उच्च लागत और सीमित नियंत्रण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं और भारत में पूर्ण इंजन सत्यापन + घटक-स्तरीय परीक्षण को सक्षम बनाता है लेकिन इन सब प्रोसेस में अंतहीन समय लगता है।
पहला राष्ट्रीय एयरो इंजन परीक्षण परिसर बनाने से कावेरी इंजन और भविष्य के 110-120 kN कार्यक्रमों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और सैफरान और वैश्विक ओईएम के साथ सहयोग के द्वार भी खुलते हैं। आरएफआई चरण के बाद परियोजना रक्षा अधिग्रहण परिषद के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी और इसके साथ ही भारत अंततः अपने जेट इंजन पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ की हड्डी का निर्माण कर रहा है जिसमे डिजाइन से लेकर परीक्षण तक, पूरी तरह से स्वदेशी स्तर पर तेजी से कार्य शुरू है।
इस सुविधा से क्या मिलेगा:
- वास्तविक उड़ान स्थितियों के लिए उच्च ऊंचाई सिमुलेशन सिस्टम।
- इसके लिए समर्पित रिग्स।
- फैन, कंप्रेसर, कंबस्टर।
- टरबाइन और आफ्टरबर्नर परीक्षण।