Today Monday, 23 March 2026

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सीमा पार उग्रवाद में शामिल अमेरिकी खूंखार गुप्तचर गिरफ्तार


दिल्ली:
भारतीय जांच एजेंसी NIA ने म्यांमार में उग्रवादियों को ट्रेनिंग देने से जुड़े सात विदेशियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर म्यांमार के उग्रवादियों को ट्रेनिंग देने और भारत के रास्ते ड्रोन भेजने का आरोप है। अधिकारियों ने बताया कि मिजोरम के रास्ते म्यांमार के हिंसाग्रस्त इलाकों में अवैध रूप से जाने की जांच के बाद ये गिरफ्तारियां की गईं हैं जिसमे 6 यूक्रेन के नागरिक और 1 अमेरिका का नागरिक है। इनके अवैध घटनाक्रम को वजागर करते हुए जांचकर्ताओं ने बताया कि संदिग्धों ने कथित तौर पर मिजोरम में प्रवेश किया और फिर अवैध रूप से सीमा पार करके म्यांमार चले गए तथा जांच अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने जातीय उग्रवादियों को ट्रेनिंग दिया और उन्हें ड्रोन उड़ाने की तकनीकें भी सिखाईं।  

भारत के भौगोलिक तस्वीरों के अनुसार भारत की म्यांमार के साथ 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जहां भारतीय राज्यों के करीब सशस्त्र जातीय समूह सक्रिय हैं जिससे सीमा पार होने वाली उग्रवादी गतिविधियां मणिपुर, मिजोरम और आस-पास के इलाकों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं इसलिए NIA के अधिकारी उग्रवादियों की ट्रेनिंग और ड्रोन की सप्लाई के रास्तों में किसी भी संभावित अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव की भी जांच कर रहे हैं क्योंकि यह मामला म्यांमार के साथ लगने वाली भारत की संवेदनशील उत्तर-पूर्वी सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उजागर करता है। 

NIA द्वारा पकड़े गए आरोपियों में एक मैथ्यू वैनडाइक है जो अमेरिका नागरिक है तथा यह अमेरिका की गुप्तचर एजेंसी CIA के 'डीप स्टेट एसेट' (गुप्त एजेंट) के तौर पर जाना जाता है और यह बहुत ही शातिर और खतरनाक बताया जाता है क्योंकि यह लीबिया, वेनेज़ुएला और अन्य देशों में सत्ता परिवर्तन से जुड़े कई ऑपरेशन्स में शामिल रहा है। यह यूक्रेन में कई ऑपरेशन्स को अंजाम देने के लिए कई पाकिस्तानियों की भी भर्ती किया था। बताया जा रहा है किअभी कुछ महीने पहले इसने 6 यूक्रेनियों की एक टीम का नेतृत्व किया था और म्यांमार में सक्रिय गुप्त रूप से सक्रीय था। वैसे  वैन डाइक का एक भाड़े के सैनिक के तौर पर लंबा और काफी बदनाम इतिहास रहा है जिसमे वह 2011 के लीबियाई गृहयुद्ध में गद्दाफ़ी के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी और वहां पकड़े जाने पर उसने पांच साल पांच महीनों तक युद्धबंदी (POW) बनाकर रखा गया था, बाद में वह वहां से किसी तरीके से बच निकला और एक मशीन गनर के तौर पर फिर से लड़ाई में शामिल हो गया और इसको अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सेना के साथ भी देखा गया था।

बताया जा रहा है कि अभी तक यह बात सामने आयी है कि ये सभी लोग वैध वीजा लेकर भारत आए थे, लेकिन इसके बाद इन्होंने अवैध रूप से मिजोरम के संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश किया और वहां से सीमा पार कर म्यांमार पहुंच गए, NIA के अनुसार, म्यांमार में इन विदेशी नागरिकों ने वहां के जातीय वार ग्रुप्स से संपर्क स्थापित किया। आरोप है कि पहले ये दिखावे के लिए स्वयं वहां हथियारों और ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण ले रहे थे और बाद में वही प्रशिक्षण इन उग्रवादी समूहों को देने लगे। इन समूहों के सम्बन्ध भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सक्रिय उल्फा,बोडो और कूकी संगठनों से बताए जा रहे हैं जिससे मामला और गंभीर हो जाता है और साथ ही यह भी बात सामने आया है कि इन लोगों ने यूरोप से बड़ी मात्रा में ड्रोन मंगवाए, जिन्हें भारत के रास्ते म्यांमार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी, आशंका है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों, निगरानी और संभावित आतंकी अभियानों के लिए किया जाना था।

दिलचस्प बात यह है कि यह यूक्रेनी और अमेरिकी ऑपरेटिव सीधे भारत के अंदर सक्रिय नहीं थे। उन्हें लगा कि म्यांमार के अंदर लगभग 50 किलोमीटर दूर रहकर और भारत की सीमा के पास महीनों तक काम करने से वे भारतीय एजेंसियों की निगरानी से बच जाएंगे लेकिन इंडियन आर्मी की ईस्टर्न आर्मी कमांड की इंटेलिजेंस यूनिट पहले से ही उनकी गतिविधियों पर नज़र राखी हुई थी। सिग्नल इंटेलिजेंस, उनकी गतिविधियों के पैटर्न और अपने लोकल इनपुट्स से मिली सूचनाओं से धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया और इस खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की गई तथा इस पूरे ऑपरेशन में NIA, इंडियन आर्मी और मिलिट्री इंटेलिजेंस की सामूहिक भूमिका मानी जा रही है।
कुल मिलाकर यह ऑपरेशन एक बार फिर दिखाता है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां सीमा के आसपास होने वाली हर गतिविधि पर गहरी और लगातार निगरानी रखती हैं, चाहे वह गतिविधियाँ सीमा के इस पार हों या उस पार, सीमा से दूर रहकर भारत के खिलाफ षड्यंत्र रचने की उनकी योजना आखिरकार भारतीय सुरक्षा तंत्र की सतर्कता के सामने टिक नहीं पाई और अब दिल्ली की अदालत ने इन सातों आरोपियों को 11 दिनों की कस्टडी में भेज दिया है एवं जांच एजेंसियों द्वारा आगे की जांच युद्ध स्तर पर जारी है। 

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