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CRPF जवानों के खिलाफ रसोई के सामान का इस्तेमाल करें
पश्चिम बंगाल :
पश्चिम बंगाल में जैसे जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है वैसे वैसे वहां सत्ता पक्ष पार्टी TMC की मुखिया ममता बनर्जी की बौखलालाहट बढ़ती जा रही है और इसी बौखलाहट में हर रोज केंद्र सरकार एवं केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ बंगाल की जनता को हिंसा के लिए उकसा रही है जिसमे अभी कुछ दिनों पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रानीगंज रैली में कहा कि "अगर आज नहीं, तो कल , मैं आपमें से किसी एक को भी नहीं बख्शूँगी।" और इस बयान के बाद वहां की राजनीति काफी गरम हो गई और कहीं-कहीं खूनी झड़प भी हुई। लेकिन अब नक्सलबाड़ी की रैली में CM ममता बनर्जी ने एक कदम और बढ़ाते हुए फिर विवादित भाषण दिया कि महिलाएं जयादा से ज्यादा से संख्या में मतदान केंद्रों पर उपस्थित रहें और महिलाओं को उकसाते हुए आगे कहा, "जरूरत पड़ने पर मतदान केंद्रों पर CRPF जवानों के खिलाफ रसोई के सामान का इस्तेमाल करें। " और इस बयान के बाद तो सभी केंद्रीय एजेंसियां सकते में आ गई क्योंकि पिछले कई चुनावों में देखा गया है कि ऐसे बयान आने के बाद किस प्रकार राज्य में भीषण खूनी संघर्ष होता है इसलिए ECI ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को तुरंत निर्देश दिया है कि वे ऐसे बयानों पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपें और इसके साथ ही ECI ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए, मुख्य कार्यकारी अधिकारी के प्रस्ताव पर 83 बीडीओ और 1 एआरओ के तबादलों को मंजूरी दी है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र तरीके से संपन्न हो सके।
इस तरह के राजनीतिक बयान हमेशा माहौल को गरमा देते हैं, खासकर चुनावों से पहले और जब ममता बनर्जी इतनी तीखी भाषा का इस्तेमाल करती हैं, तो भारतीय जनता पार्टी जैसे विरोधियों की तरफ से प्रतिक्रिया आना तय होता है लेकिन आम जनता का कहना है कि बीजेपी तीखी प्रतिक्रिया तो करती है लेकिन वह पिछले 12 सालों से केंद्र की सत्ता में है एवं संविधान का अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि यदि राज्य सरकार केंद्र के निर्देशों का पालन नहीं करती है, तो वह सरकार को बर्खास्त कर के राष्ट्रपति शासन लागू कर दें लेकिन इसके बावजूद, BJP केवल शिकायत या प्रतिक्रिया ही केवल देती रही है जिससे आम जनता में ही नहीं बल्कि बीजेपी कार्यकर्ताओं में भी मायूसी नजर आती है।
केंद्रीय चुनाव आयोग भी पश्चिम बंगाल के हालात देखकर सख्ती बरतते हुए बंगाल में प्रशासनिक अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई कर रही है जिसमे हाल ही में तीन CRPF जवानों को सस्पेंड किया जो एक वायरल वीडियो में वे बीरभूम के सूरी में TMC पार्टी के दफ़्तर के अंदर आराम से कैरम खेलते दिख रहे थे और इफ्तार पार्टी में शामिल होने के लिए 7 जवानों को पहले ही सजा दी जा चुकी थी।
वैसे बंगाल में आम राय यह है कि विरोधियों को 'न बख्शने' का वादा करने के बजाय, राज्य के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कोई कसर न छोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। बंगाल के मतदाताओं को कोरी बयानबाजी से चुप नहीं कराया जा सकता है और वह मतपेटी के माध्यम से जवाब देंगे। धमकियाँ उन लोगों का आखिरी सहारा होती हैं, जिन्हें इस बात का एहसास हो जाता है कि अब जमीनी हालात बदल रहे हैं।
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