डिजिटल डेस्क :
अभी लोग TCS कंपनी में हो रहे यौनशोषण और धर्मांतरण की खबरों से उबर भी नहीं पाए थे कि एक और हिन्दू संस्कृति विरोधी चश्मा बनानेवाली कंपनी लेंसकार्ट के खिलाफ लोगों का गुस्सा फुट पड़ा है जिसमे जब लोगो को उसके भेदभाव पूर्ण DEI पॉलिसी के बारे में पता जिसमे बताया गया था कि मुस्लिम महिलाओं को हिजाब जैसी उनके मजहबी ड्रेस को पहनने का अनुमति है लेकिन वहीँ दूसरी ओर हिन्दू महिलाओं को उनके संस्कृति के अनुसार बिंदी ,तिलक ,कलावा और यहाँ तक कि शादी शुदा हिन्दू महिला कर्मचारी को सिन्दूर लगाने की भी सख्त मनाई थी जो कि हिन्दू धर्म के अनुसार उनके विवाह उपरांत उनकी पवित्र निशानी है और सिन्दूर के जगह रेड मार्कर से हल्का सा टिक लगा सकते हैं वह भी माथे पर बिलकुल नहीं दिखाई देना चाहिए और पुरुषों को केवल काली पगड़ी पहनने की अनुमति थी यानि लेंसकार्ट कंपनी के DEI पॉलिसी का दोगलापन सीधा सीधा दर्शा रहा था कि एक मजहब को उसके संस्कृतिक लिबास में रहकर काम करने की पूर्ण छूट है लेकिन भारत जैसे हिन्दू बहुल देश में हिन्दू को अपनी सांस्कृतिक वेशभूषा में काम करने की मनाई है।
जब लेंसकार्ट के ऐसे दोगलेपन वाले DEI पॉलिसी पर पूरे देश में बवाल शुरू हुआ एवं कई जगह विरोध प्रदर्शन भी होने लगे तो लेंसकार्ट के मालिक/CEO पियूष बंसल ने अपने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पर सफाई दिया और माफ़ी भी मांगी और कहा कि हिन्दू धर्म या संस्कृति के प्रति भेदभाव करने का हमारे कंपनी की कोई भी मंशा नहीं है और जो पॉलिसी मीडिया में देखा गया है, वह फेब्रुअरी 2026 में हटा दिया है और हमें इस गलती को पहले ही सुधार लेना चाहिए था लेकिन हम सुधार नहीं पाए इसलिए यदि किसी की धार्मिक भावना को ठेस लगी है तो माफ़ कर दिया जाए।
आम जनता उनके इस माफीनामे को एक छलावा बता रही है और पूछ रही है कि लेंसकार्ट के पीयूष बंसल ने कहा कि वे यह पॉलिसी फेब्रुअरी 2026 को हटाया यानि फेब्रुअरी 2026 के पहले तक उसी पॉलिसी के तहत हिन्दू महिला कर्मचारियों के सांस्कृतिक पहचान मिटने की कोशिश की जा रही थी और अब यह मामला ज्यादा तूल पकड़ लिया है इसलिए ऐसी खोखली भरी सफाई देने के लिए आगे आए हैं। कुछ का तो कहना है कि पियूष बंसल ने ऐसी पॉलिसी जानबूझकर लागू की होगी क्योंकि उनके विदेशी इन्वेस्टर यही चाहते हों और वे पैसे के लिए हिन्दू संस्कृति की पहचान मिटाने के लिए ऐसी पॉलिसी लाया होगा। कुछ सोशल मीडिया में लिख रहे हैं कि ऐसी हिन्दू विरोधी लेंसकार्ट के दुकान से कोई भी सामान नहीं लेंगे क्योंकि जो हमारे भारत की संस्कृति का सम्मान नहीं करता तो हम उसके यहाँ से खरीददारी क्यों करें।
वैसे लेंसकार्ट अपनी सफाई में कुछ भी तर्क दे लेकिन ऐसी घटनाओं से एक बात साफ हो गई है कि कमोबेश सारी कॉर्पोरेट कंपनियों की हिन्दू विरोधी मानसिकता का पर्दाफाश हो गया है, चाहे यह इन्वेस्टर के दबाव में कर रहे हैं या किसी विशेष विचरधारा के दबाव में होकर कर रहे है।