डिजिटल टीम :
गरुड़ कमांडो फोर्स भारतीय वायु सेना की विशेष इकाई बल है। इसका गठन 6 फरवरी 2004 को हुआ था । इकाई का नाम हिंदू देवता गरुड़ से लिया गया है। गरुड़ बलों को महत्वपूर्ण वायु सेना अड्डों और प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, खोज, बचाव, और आपदाओं या संकटों के दौरान राहत एवं सुरक्षा प्रदान करने का कार्य सौंपा जाता है, और अब भारतीय वायु सेना (IAF) अपने गरुड़ स्पेशल फोर्सेज को मजबूत, स्वदेशी माइक्रो ड्रोन से लैस कर रहा है जो सबसे मुश्किल युद्ध के मैदानों और मुश्किल माहौल के लिए बनाए गए हैं। यह स्वदेशी माइक्रो ड्रोन 16,400 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर परिचालन (Ops) के लिए उन्नत स्वदेशी माइक्रो मानव रहित हवाई वाहन (UAV) है और इसको खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने इन ड्रोन्स की खरीद के लिए सूचना का अनुरोध (RFI) जारी किया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत "मेड इन इंडिया" होंगे।
स्वदेशी माइक्रो UAV की प्रमुख विशेषताएं :
- क्षमता: ये कॉम्पैक्ट, हल्के और मैन-पोर्टेबल (सैनिकों द्वारा ले जाने योग्य) होंगे।
- उन्नत विशिष्टता: इन ड्रोन्स में वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL), दिन-रात निगरानी के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड पेलोड, और जीपीएस-डिनाइड (GPS-denied) क्षेत्रों में काम करने की क्षमता होगी।
- स्वदेशी सामग्री: आरएफआई के अनुसार, इन ड्रोन्स में कम से कम 60% स्वदेशी टेक्नीकल पुर्जे (Indigenous Content) होगी।
- परिचालन क्षमता: ये ड्रोन समुद्र तल से 16,400 फीट तक की ऊंचाई पर और -20°C से +50°C तक के तापमान में काम कर सकते हैं।तकनीकी
- सीमा और स्थिरता: इनकी मिशन रेंज कम से कम 15 किमी और सहनशक्ति (endurance) कम से कम 60 मिनट होगी।
इस ड्रोन की जबरदस्त टारगेट ट्रैकिंग और रियल-टाइम इंटेल को ध्यान में रखते हुए इसका उपयोग लद्दाख जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों और हिमालय के कठिन इलाकों में होगा जो गरुड़ कमांडो की टोही और निगरानी क्षमताओं को काफी बढ़ा देगा।