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कैसे पता करें दवा असली या नकली
महाराष्ट्र:
महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को शुद्ध और सुरक्षित दवाएं सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के आठ प्रशासनिक विभागों में अत्याधुनिक 'ड्रग डिटेक्शन मशीनें' तैनात की गई हैं, जो महज दो से तीन मिनट के भीतर दवाओं के नमूनों की प्राथमिक गुणवत्ता जांच (फर्स्ट-लाइन टेस्टिंग) कर सकती हैं। इस तकनीक के आने से अस्पतालों में नकली या घटिया दवाओं की तुरंत पहचान की जा सकेगी और किसी भी प्रकार का संदेह होने पर विस्तृत जांच के लिए नमूने तुरंत केंद्रीय प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब हाल ही में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की 'ड्रग अलर्ट रिपोर्ट' में देश की कई दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, जिससे आम जनता में चिंता बढ़ी है।
आम नागरिक २ मिनट में कैसे पहचानें असली और नकली दवा?
जब तक यह मशीनें हर जगह उपलब्ध नहीं होती, तब तक आम मरीज भी दवा खरीदते समय नीचे दिए गए स्मार्ट स्टेप्स को अपनाकर सिर्फ २ मिनट में दवा की प्रामाणिकता और गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं:
- QR कोड स्कैन करें: सरकार ने देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांड्स के लिए पैकेजिंग पर क्यूआर (QR) कोड अनिवार्य कर दिया है। अपने स्मार्टफोन से इसे स्कैन करके आप २ मिनट के भीतर निर्माता का नाम, सटीक बैच नंबर और एक्सपायरी डेट पुष्टि कर सकते हैं।
- स्पेलिंग और प्रिंटिंग की जांच: नकली दवाओं के पैकेट पर अक्सर ब्रांड नेम या साल्ट की स्पेलिंग में मामूली गलतियां (जैसे 'O' की जगह '0') होती हैं। लिखावट धुंधली या संदेहास्पद होने पर दवा तुरंत रिजेक्ट करें।
- भौतिक स्थिति (Physical Condition): दवा की सील टूटी नहीं होनी चाहिए। पैकेट खोलने पर यदि कैप्सूल आपस में चिपके हुए हों, गोलियों का रंग बदला हुआ हो या वे पाउडर की तरह टूट रही हों, तो वे घटिया गुणवत्ता की हो सकती हैं। GMP सर्टिफिकेशन देखें: दवा के मैन्युफैक्चरर की वेबसाइट पर जाकर या पैकेट पर यह जांचें कि क्या कंपनी को WHO-GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) सर्टिफिकेट मिला हुआ है। यह मार्क उच्च गुणवत्ता की गारंटी देता है।
मरीजों के लिए सलाह: हमेशा केवल वैध लाइसेंस वाले मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें। यदि किसी दवा को खाने के बाद शरीर में कोई असामान्य रिएक्शन या साइड इफेक्ट दिखे, तो तुरंत डॉक्टर को सूचित करें क्योंकि वह दवा सब-स्टैंडर्ड हो सकती है।
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