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मराठी भाषा मुद्दे पर रिक्शा-टैक्सी चालकों को मिला आठवले का साथ


मुंबई,महाराष्ट्र :
जब से महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आदेश दिया कि अब जिन लोगों को मराठी भाषा बोलना, लिखना और पढ़ना आएगा उन्ही लोगों को रिक्शा-टैक्सी चलाने का परमिट मिलेगा और जिसको यह सब नहीं आएगा उनका परमिट जांच के आधार पर रद्द किया जा सकता है, परिवहन मंत्री ने इसकी समय सीमा एक महीने से बढ़ाकर अब तीन महीने कर दिया है, तब से सभी परप्रांतीय रिक्शा-टैक्सी चालकों में भय का वातावरण निर्माण हो गया है और यदि उनका परमिट रद्द कर दिया गया तो उनके सामने अपने घर परिवार का पेट पालने का बहुत बड़ा संकट उत्पन्न हो जाएगा और इन परप्रांतीय रिक्शा-टैक्सी चालकों का कहना है कि हम में से कई मराठी समझ और थोड़ा बहुत मराठी बोल तो लेते हैं लेकिन लिख नहीं सकते है इसलिए हमें डर है कि हम लोग कई दशकों से रिक्शा-टैक्सी चलाकर अपना जीवनयापन कर रहे थे लेकिन ऐसे आदेश से हमारे सामने रोजी रोटी का संकट तो उत्पन्न होगा ही और साथ ही साथ हमारे बच्चो का पढ़ाई पूरा नहीं हो पाएगा जिससे उनका आनेवाला भविष्य अंधकारमय हो जाएगा, वहीं कुछ रिक्शा चालकों का कहना है कि लगभग बड़ी संख्या में परमिट मराठी भाषिक लोगों का है और अब वे रिक्शा नहीं चलाते बल्कि हम उनकी रिक्शा शिप ( रोज के भाड़े) पर चलाते हैं या उनके परमिट को पांच-दस लाख में लेकर उनके परमिट पर रिक्शा-टैक्सी चलाते हैं इसलिए यह आदेश लागू होने से मराठी भाषिक लोग भी प्रभावित होगें।  

महाराष्ट्र शासन के आदेश के बाद कहीं-कहीं विरोध के स्वर भी उठ रहे हैं जिसमे नागपुर की ऑटो रिक्शाचालक मालक संघटना सयुंक्त कृति समिति महाराष्ट्र ने खुलकर इस आदेश का विरोध किया है और बताया कि ऐसे आदेश से स्वयं रोजगार को बहुत बड़ा धक्का लगेगा जिससे रिक्शा-टैक्सी चालकों की उपजीविका धोखे में पड़ जाएगी।

 मराठी भाषा के मुद्दे पर रिक्शा-टैक्सी चालकों का साथ देने के लिए केंद्रीय मंत्री और महारष्ट्र के सबसे बड़े कद्दावर नेता रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (RPI) के प्रमुख रामदास आठवले  खुलकर सामने आए हैं और उन्होंने मीडिया के सामने बेबाकी से कहा कि पिछले कुछ दिनों से मुंबई और उपनगरों के सैकड़ों रिक्शा-टैक्सी चालक डरे हुए हैं। परिवहन विभाग के नए नियम से उन्हें अपना लाइसेंस रद्द होने का डर सता रहा है, हमें मराठी भाषा पर पूरा गर्व है और यहाँ रहने वालों को मराठी भाषा आनी ही चाहिए लेकिन रिक्शा चलाने वाले अमीर नहीं होते, कइयों ने कर्ज लेकर गाड़ियां ली हैं और उसका कर्ज या क़िस्त चुकाना रहता है इसलिए भाषा का आग्रह प्यार से होना चाहिए, किसी गरीब का घर उजाड़ कर नहीं। उन्होंने आगे कहा क़ि मुंबई की खासियत अनेकता में एकता है, जैसे होटल व्यवसाय में आए 'शेट्टी' समाज और अन्य लोगों ने समय के साथ प्यार से मराठी सीखी और यहाँ की मिट्टी से जुड़ गए, वही न्याय रिक्शा चालकों के लिए क्यों नहीं? हमारा संविधान हर नागरिक को सम्मान से रोजी-रोटी कमाने का अधिकार देता है इसलिए कानून का डर दिखाकर रोजगार छीनने के बजाय, विश्वास में लेकर बदलाव लाना अधिक प्रभावी होता है और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) हमेशा गरीबों और शोषितों की ढाल बनती रही है तथा हम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी गरीब के पेट पर लात न पड़े और साथ ही मेरी सभी रिक्शा-टैक्सी चालक भाइयों से भी अपील है कि वे मराठी सीखने का प्रामाणिक प्रयास करें, क्योंकि भाषा जोड़ने के लिए होती है, तोड़ने के लिए नहीं। महाराष्ट्र सरकार भी दंडात्मक कार्रवाई के बजाय प्रशिक्षण पर जोर दे, जिससे मराठी का सम्मान और कष्टकरों का स्वाभिमान दोनों बरकरार रहे।
 
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (RPI) के प्रमुख रामदास आठवले ने रिक्शा-टैक्सी चालकों के डर को दूर करने के लिए वे रिक्शा में बैठकर प्रवास भी किया जिससे सभी रिक्शा-टैक्सी चालकों में उम्मीद की एक किरण जागी है और उन्हें भी लग रहा है कि उनकी भी आवाज कोई इतना बड़ा नेता उठा रहा है। 

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