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पुढच्या वर्षी लवकर या... के जयकारों के साथ विदा हुए बाप्पा
मुंबई:
मुंबई में साल 2026 का मुख्य गणपति विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) कल यानी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ संपन्न हो चुका है। इस बार 14 सितंबर से शुरू हुआ गणेशोत्सव पूरे 12 दिनों तक चला, जिसमें बप्पा के भक्तों ने बड़े ही हर्षोल्लास से उनकी पूजा अर्चना एवं सेवा की और आज आखिरी दिन बाप्पा का विसर्जन भी बहुत हर्षोल्लास के साथ साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
गणपति विसर्जन के दिन की हलचल !
घरों में स्थापित मूर्तियों के विसर्जन के लिए सुबह 6:15 बजे से 10:45 बजे तक का समय सबसे उत्तम रहा।
गणेश उत्सव के समापन के अवसर पर मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के गणपति विसर्जन में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, बप्पा की एक झलक पाने और उन्हें भावभीनी विदाई देने के लिए हजारों भक्त एकत्र हुए, 'जय श्री राम' और 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा, जबकि ढोल-ताशों की गूंज के बीच बप्पा की विदाई का भव्य नजारा देखने को मिला।
- दोपहर और रात का मुहूर्त: बड़े सार्वजनिक मंडलों के जुलूस दोपहर 12:15 बजे से शुरू होकर पूरी रात और आज सुबह तक चलते रहे।
- मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस साल भक्तों की सुविधा के लिए 67 प्राकृतिक स्थल और शहर भर में करीब 383 कृत्रिम (Artificial) तालाब बनाए थे।
- मुंबई पुलिस और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने प्रतिमा विसर्जन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. अधिकारियों ने बताया कि यातायात नियंत्रित करने और शोभायात्राओं की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए दिनभर 24,000 सेे अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे और बीएमसी ने 25,000 कर्मचारियों को तैनात किया था।
- निगरानी: ट्रैफिक और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 51 वॉच टावर और खराब वाहनों को हटाने के लिए 95 क्रेन सड़कों पर मौजूद थीं।
- सड़कें बंद व डायवर्जन: विसर्जन जुलूसों के कारण दक्षिण मुंबई और उपनगरों के कई प्रमुख मार्गों को सामान्य यातायात के लिए बंद किया गया था और ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर मोड़ा गया था। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मुंबई पुलिस और प्रशासन की अपील पर रेलवे और मेट्रो प्रशासन ने 24 घंटे लोकल ट्रेनें और मेट्रो सेवाएं चलाईं, ताकि लोग रात में विसर्जन देखने के बाद सुरक्षित घर लौट सकें।
- मुंबई में इस दौरान कुल 36,128 गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया गया जिसमें से 6,936 सार्वजनिक मूर्तियां, 28,638 घरगुती मूर्तियाँ और 554 हरतालिका की मूर्तियाँ थीं।
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