मुंबई:
मुंबई पिछले कई वर्षों से अवैध फेरीवालों एवं घुशपैठियों से कराह रही थी जो मानो पूरे मुंबईकरों को बंधक बना के रख दिए थे जिसका अंदाजा आप इस घटना से लगा सकते हैं जिसमे मुंबई के उपनगर कांदिवली में एक बिल्डिंग के रहिवासियों ने अपने बिल्डिंग में घुसने के लिए भाड़े पर कई बाउंसर रखे थे ताकि वे अपने बिल्डिंग में आसानी से जा सकें क्यूंकि रोड से लेकर उनके बिल्डिंग के मुख्य गेट तक अवैध फेरीवालों ने कब्ज़ा करके रखा था और बिल्डिंग के रहिवासी जब फेरीवालों को रास्ता देने को बोलते तो वे उन पर हिंसक हो जाते थे। अब आप ही सोचिये जब ऐसे बिल्डिंगों की हालत है तो स्लम के लोग ऑक्सीजन भी मुश्किल से ले पाते होंगे और वैसे देखा जाए तो मुंबई में कानूनी तौर पर केवल और केवल 99,435 विक्रेताओं (स्टाल मालिक ) को ही मनपा ने वैध लाइसेंस दिया है लेकिन मुंबई में लगभग 6 लाख फेरीवालें हैं और एक ऐसी यंत्रणा तैयार किया है कि इसको तोड़ने में अब सरकार को भी पसीना आ रहा है क्योंकि अब यह केवल छोटा-मोटा फेरी का धंधा नहीं रह गया है जबकि अब यह लगभग ₹2700 करोड़ के सिस्टम से चल रहा है और यदि सूत्रों की माने तो हर फेरीवाले का रोज़ाना ₹100 रुपये का 'हफ़्ता' (रिश्वत) इस पूरे सिस्टम को जाता है रोज का ₹6 करोड़ होता है और यह सिस्टम साल भर में लगभग ₹2000 करोड़ रुपये की कमाई करता है और 'बड़े साहब' को इसमें से 17% हिस्सा मिलता था यानी, दूसरे सभी स्रोतों को छोड़कर, सिर्फ़ हॉकरों से ही उन्हें साल भर में ₹372 करोड़ रुपये मिलते थे। कुछ अधिकारीयों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि फेरीवालों को हटाना हम भी चाहते है लेकिन उनका गठजोड़ इतना तगड़ा है कि ऊपर लेवल पर तिकड़म लगा कर हमारा ही ट्रांसफर करावा देते हैं या हम पर प्राणघातक हमला करावा देते हैं जिसमे लोकल आमदार, नगरसेवक या नेता हमारा साथ देते ही नहीं बल्कि कभी-कभी ऐसे लोग भी हमें धमकाते रहतें है और इनका छोड़िये हमारे ऊपर के अधिकारी भी हमारा साथ देने के बजाय बोलते हैं "गप्प बस" इसलिए हमें भी इसी सिस्टम में चलना पड़ता है।
अवैध फेरी का धंधा अब केवल पेट के लिए नहीं रह गया है बल्कि अब यहअवैध घुसपैठ का भी मुद्दा बन गया जो मुंबई ही नहीं पूरे भारत के लिए खतरा बन गया है जिसमे रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुख्य रूप से है जिसमे इन लोगो को भारत में घुसाने के लिए पूरी प्लानिंग के तहत भारत के सीमावर्ती इलाकों से अंदर लाया जाता है और इनके फर्जी आधार कार्ड वगैरा मात्र दो से तीन हजार में पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ रिमोट एरिया का बनाया जाता है और फिर मुंबई जैसे शहरों में घुसाने और बसाने का खेल शुरू होता है जिसमे इन सबको एक 200 से 300 स्कवायर फुट के कमरे में रखा जाता है फिर सबको एक आदमी जिसके पास काम से काम 700 लकड़ी के ठेले रहता है और वह इन सभी घुसपैठियों को एक एक ठेला और बेचने का सामन देता है की पूरा दिन इसको बेच के लाओ जिसमे यह आदमी एक ठेले का ₹60 लेता है और बिके हुए सामान का अलग पैसा लेता है जो लगभग रोज का ₹1 लाख कमाता है और उसमे से वह लोकल गुंडों से लेकर पुलिस तक से सुरक्षित रखता है और बाकी रोज ₹100 उपर्युक्त सिस्टम में जाता है।
अब आप ही सोचिये ऐसे हजारों करोड़ के सिस्टम से लड़ना आसान काम नहीं है लेकिन जब से मुंबई मनपा की कमान बीजेपी के हाथ में आई है तब से अवैध फेरीवालों और अवैध घसपैठियों के खिलाफ एक जबरदस्त मुहीम चलाई जा रही है जिसकी शुरूवात बीजेपी के ही किरीट सोमैया ने काफी निडर होकर किया था जिसमे उनपर कई बार हमले की भी कोशिश हुई थी लेकिन उन्होंने अवैध घुसपैठिया एवं फेरीवाला मुक्त मुंबई का अभियान और भी मुखर होकर उठा रहे हैं। अब इस कड़ी में मुंबई हाई कोर्ट भी बोरीवली के मोबाइल शॉप के सामने से अवैध फेरी न हटाने के मुद्दे पर सुनवाई करते समय सरकार, मनपा एवं पुलिस प्रशासन को इन अवैध फेरीवालों पर सख्त कार्यवाई करने का आदेश दिया है जिसमे कोर्ट ने सीधे सीधे कहा कि अवैध फेरीवालों के अधिकारों को, सार्वजनिक जगहों और फुटपाथों का इस्तेमाल करने वाले अन्य लोगों के अधिकारों से ऊपर नहीं रखा जा सकता है और संदिग्ध बांग्लादेशियों या रोहिंग्या सहित मुंबई के फेरीवालों के सत्यापन का निर्देश दिया है।
पीठ ने नगर निकाय और पुलिस को तुरंत सत्यापन का आदेश:
- स्टाल मालिकों, सहायकों और सहायकों की पहचान।
- नागरिक निकाय और पुलिस इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार।
- दस्तावेजों के बिना बांग्लादेशी नागरिक या विदेशी नागरिक होने के संदिग्ध व्यक्तियों को शामिल करने के लिए सत्यापन जरूरी।
- सत्यापन बिना किसी देरी के किया जाना चाहिए।
अवैध घुसपैठियों और अवैध स्टाल मालिकों और कर्मचारियों की पहचान करना राष्ट्रीय सुरक्षा और शहरी प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।