Today Friday, 19 June 2026

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AI ने पकड़ा सबसे बड़ा भ्रष्ट्राचार, ₹9.25 करोड़ का लगा जुर्माना


मुंबई :
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में काफी गहराई तक फैले भ्रष्टाचार को पकड़ने के लिए मनपा आयुक्त अश्विनी भिड़े ने AI तकनीकी का इस्तेमाल किया है और भ्रष्टाचार पकड़ने के लिए ऐसा उपयोग भारत में पहली बार किया गया है। पिछले दिनों मीठी नदी के सफाई में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ था जिसमे EOW एवं ED ने इस भ्रष्टाचार में लिप्त कई  ठेकेदारों को गिरफ्तार भी किया था इसलिए इन सबसे सबक लेते हुए मनपा आयुक्त ने मॉनसून से पहले नाला, गटर और नदी से गाद निकालने के काम में गड़बड़ी को पकड़ने के लिए AI को उपयोग किया जिसमें ठेकेदार द्वारा कई गड़बड़ियां पाई गई जिसके लिए ठेकेदारों पर भरी भरकम ₹9.25 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है और ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉनिटरिंग सिस्टम से भ्रष्टाचार पकड़ने के खुलासे से देश को ऐसी तकनिकी इस्तेमाल करने का एक नया रास्ता मिल गया है।
 
जुर्माने से जुड़ी मुख्य बातें: 
  • कुल जुर्माना राशि: ₹9.25 करोड़। 
  • वसूली का तरीका: नगर निकाय यह रकम सीधे ठेकेदारों के बकाया बिलों से काट रहा है। 
  • जुर्माना किसने लगाया: म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े के निर्देशों पर BMC के स्टॉर्म वॉटर ड्रेन विभाग ने यह कार्रवाई की। 
  • AI से पकड़ी गई गड़बड़ियां: AI-आधारित सिस्टम ने ज़रूरी वीडियो, साइट की तस्वीरें और GPS रिकॉर्ड की जांच किया जिसमे पाया गया कि नकली बिल बनाने के लिए अलग-अलग साइटों पर एक ही तस्वीर का कई बार इस्तेमाल किया गया है और साथ ही गाद ढोने वाली गाड़ियों का ज़रूरी सिल्ट अनलोडिंग वीडियो अपलोड नहीं किया गया था और इस धांधली में गाद ढोने वाली गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर और वर्क कोड में अंतर पाया गया। गाद निकालने वाली साइट की तस्वीरों को अपलोड नहीं किया गया और गाद निकलने के लिए जो ज़रूरी मशीनरी को लगाना चाहिए था उसको काफी देर से लगाया गया एवं गाद निकालते समय साइट पर काम करने वाले कर्मचारियों को उचित सुरक्षा उपाय उपलब्ध नहीं किए गए थे। 
जुर्माने का बंटवारा: 
  • बड़े नाले: ₹1.39 करोड़ 
  • छोटे नाले: ₹6.11 करोड़ 
  • मीठी नदी: ₹1.48 करोड़ 
  • अतिरिक्त जुर्माना: ₹26.46 लाख (हर "खराब डीसिल्टिंग ट्रिप" पर ₹1,000 का जुर्माना)। 
  • मौके पर जांच के नतीजे: AI डेटा के साथ-साथ सिविक बॉडी की ओर से मौके पर की गई जांच में पता चला कि कर्मचारियों की कमी थी और उनके पास सुरक्षा के ज़रूरी सामान नहीं थे और निकाली गई गाद (silt) को ठीक से नहीं हटाया गया था। 

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