दिल्ली :
आज के दौर में दुनिया बड़ी तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव में चुनौतियां भी आ रही हैं और ऐसी ही चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत सरकार भी कठोर कानून ला रही है, आज के समय में AI जितना लोगों को सुविधा देगा उतना ही लोगो के लिए खतरा बनकर उभर रहा है जिसमे सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI का इस्तेमाल बच्चों से जुड़ी अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी फैलाने या किसी व्यक्ति की नकल करने के लिए किया जाता है जो कि एकदम हूबहू असली लगता है जिससे लोगो की जिंदगियां बर्बाद हो रही है इसलिए केंद्र सरकार बड़ा फैसला लेते हुए आज से AI के नए नियम लागू किया है और इस बारे में देश के प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा है कि जैसे खाने के पैकेट पर लिखा होता है कि वह 'शाकाहारी' है या 'मांसाहारी', ठीक वैसे ही अब हर एआई वीडियो, फोटो या ऑडियो पर एक लेबल लगा होगा। मान लीजिए आपने AI से एक वीडियो बनाया जिसमें कोई नेता भाषण दे रहा है, तो उस वीडियो के कोने में साफ लिखा होना चाहिए- "AI जनरेटेड" ताकि लोगो को मालूम पड़े कि यह फैब्रिकेटेड या AI जनरेटेड है।
केंद्र सरकार ने आज से AI कंटेंट और डीपफेक पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं और इसके मुख्य बिंदु :
1. AI से बने फोटो, वीडियो और ऑडियो पर आज से 'AI जनरेटेड' लेबल लगाना अनिवार्य हो गया है।
2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत मिलने पर डीपफेक फोटो या वीडियो को महज 3 घंटे में हटाने होंगे जबकि पहले इसकी समय सीमा 36 घंटे थी।
3. इंटरनेट को सबसे ज्यादा भरोसेमंद बनाने के लिए केंद्र सरकार ने साफ कहा कि यह कदम ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिस-इनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा और इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा।
4. मेटाडेटा को आप AI क्रिएटेड फाइल का डिजिटल डीएनए मान सकते हैं जो स्क्रीन पर दिखाई नहीं देता है, लेकिन फाइल की कोडिंग के अंदर छिपा होता है और इसमें उस फाइल की पूरी जानकारी होती है जिसमे वह फोटो या वीडियो किस तारीख को बना, किस AI टूल से बना और किस प्लेटफॉर्म पर पहली बार अपलोड हुआ है जिससे यदि कोई AI का गलत इस्तेमाल करता है ,तो पुलिस इस 'टेक्निकल मार्कर' के जरिए उसके असली सोर्स तक पहुंच सकेगी और अपराधी को आसानी से पकड़ सकती है और अपराध पर नियंत्रण भी कर सकती है।
5. यदि AI का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी या किसी की नकल उतारने के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर धाराओं के अंतर्गत अपराध माना जाएगा।
6. जिस प्रकार तंबाखू, सिगरेट या गुटखा के पैकेट पर वैधानिक चेतावनी लिखी जाती है उसी प्रकार AI टूल बनाने वाली कंपनियों को अपने यूजर्स को चेतावनी देनी होगी कि गलत AI कंटेंट बनाने पर सजा हो सकती है। नियम तोड़ने पर उसका कंटेंट हटाया जाएगा और उसका अकाउंट सस्पेंड या बंद किया जाएगा।
भारत में सजा का निर्धारण IT एक्ट, 2000 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत होता है जिसमें गलत कंटेंट बनाने पर मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई होगी।
- BNS धारा 353: गलत सूचना से डर या नफरत फैलाने पर 3 साल की जेल।
- BNS धारा 336: एआई के जरिए किसी की नकल उतारने पर 2 साल की जेल।
- IT एक्ट धारा 79: नियम न मानने पर प्लेटफॉर्म की कानूनी सुरक्षा खत्म।