दिल्ली :
मालाबार गोल्ड पाकिस्तानी मूल की एक लंदन में बसी महिला इन्फ्लुएंसर अलिस्बा खालिद को बचाने के चक्कर में खुद फंसता जा रहा है, बताया जा रहा है कि यह पाकिस्तानी महिला इन्फ्लुएंसर अलिस्बा खालिद अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान भारतीय सैनिकों और भारतीय सेना का मजाक उड़ाया था और जब इस बारे में सोशल मीडिया पर लोगो को मालूम पड़ा कि भारतीय सैनिकों और भारतीय सेना का मजाक उड़ाने वाली इस महिला को मालाबार गोल्ड ने अपने ब्रांड के प्रमोशन के लिए कोलैब किया है तब से ही इस खबर के बाद लोगो में गुस्सा फुट पड़ा और मालाबार गोल्ड का लोग जगह जगह विरोध करने लगे और सबसे ज्यादा विरोध लोगो ने सोशल मीडिया पर करने लगे जिसमे राइट विंग इन्फ्लुएंर्स की संख्या सबसे ज्यादा थी तथा इस विरोध के देखते हुए मालाबार गोल्ड ने देश से माफ़ी मांगने या उस पाकिस्तानी महिला इन्फ्लुएंसर अलिस्बा खालिद को अपने प्रमोशन टीम से बाहर करने के बजाय मालाबार गोल्ड भारत में स्थित कई राइट विंग के इन्फ्लुएंर्स का सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराने लगा और साथ ही साथ मानहानि का कानूनी नोटिस भी भेजने लगा जिसका विरोध अब लोग खुलकर कर रहे है और मालाबार गोल्ड ने अपनी ताकत और पहुंच के दम पर सबसे पहले राइट विंग इन्फ्लुएंर्स गुजरात के विजय पटेल (गजरिया ) का सोशल मीडिया अकाउंट बंद करवाया तथा मानहानि का कानूनी नोटिस भी भेजा था, लेकिन विजय पटेल डरने के बजाय खुलकर पुरजोर विरोध किया एवं कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए कोर्ट भी गए और अब इस लड़ाई को देश की लड़ाई बनता देख भारत सरकार की NHRC ( मानवाधिकार आयोग ) ने भी मालाबार गोल्ड के खिलाफ़ संज्ञान लेते हुए प्रोटेक्शन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स एक्ट, 1993 के सेक्शन 12 के तहत मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स से जुड़ी एक शिकायत पर आधिकारिक संज्ञान लिया है जिसमे नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) ने पाया है कि आरोपों में पहली नज़र में मानवाधिकार का उल्लंघन हुआ है और उसने कई अथॉरिटीज़ को जांच करने का निर्देश दिया है।
मुख्य आरोपों में शामिल हैं:
* एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के साथ मिलीभगत।
* भारतीय सशस्त्र बलों का सार्वजनिक रूप से मज़ाक उड़ाना।
* एक काउंटर-टेरर ऑपरेशन की आलोचना करना।
* भारत विरोधी बातों को बढ़ावा देना।
* FEMA और कॉर्पोरेट नियमों के पालन पर चिंता जाताना।
* शिकायत करने वाले के बोलने की आज़ादी के अधिकार में कथित बंदी डालना।
सभी अधिकारियों को एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR ) दो हफ़्ते के अंदर जमा करने का निर्देश:
- गृह मंत्रालय – FEMA और पब्लिक ऑर्डर के मुद्दे।
- कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय – कॉर्पोरेट और सब्सिडियरी नियमों का पालन।
- केरल पुलिस – पब्लिक ऑर्डर और उससे जुड़ी शिकायतें।
बताया जा रहा है कि यह कोई रूटीन नोटिस नहीं है और NHRC के दखल का मतलब है कि अब गंभीर जवाबदेही तय की जा रही है जिसमे देश के हित, पब्लिक ऑर्डर और मानवाधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता है एवं दूसरी तरफ 26 जनवरी, 2026 को कोर्ट ने मालाबार गोल्ड के बैंक अकाउंट्स को डीफ्रीज करने का आदेश दिया, और कहा कि पुलिस की कार्रवाई मनमानी थी और उसका कोई कानूनी आधार नहीं था लेकिन "NHRC की कार्रवाई दर्शाती है कि किसी भी संस्था का राष्ट्रीय हित और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर सरकार का सरोकार गंभीर है फिर चाहे कॉर्पोरेट हो या सोशल मीडिया, जिम्मेदारी किसी के लिए भी वैकल्पिक नहीं हो सकती है।
वहीं इस बारे में मालाबार गोल्ड ने स्पष्ट किया कि उन्होंने एक लंदन-आधारित एजेंसी के माध्यम से थर्ड पार्टी के रूप में सहयोग किया था और उन्हें इन्फ्लुएंसर के भारत-विरोधी विचारों की जानकारी नहीं थी तथा कंपनी ने इस एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।