डिजिटल डेस्क :
व्योममित्र भारत का पहला मानवाकार रोबोट है जिसे विशेष रूप से अंतरिक्ष अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया था। इसका विकास भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) द्वारा किया गया है, जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में हुई भारत के प्रगति को दर्शाता है लेकिन अब भविष्य के युद्ध के लिए भारत नित नए प्रयोगों का आविष्कार भारत कर रहा है जिसमे भारत ने भारतीय सेना में कई प्रकार के युद्ध कौशल से समाहित ड्रोन एवं फाइटर रोबोडॉग को शामिल किया है जो आनेवाले समय में अपनी निर्णायक भूमिका साबित करेंगे और अब भारतीय सेना AI आधारित ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित कर रही है, जो खतरनाक मिशनों में सैनिकों की जगह काम करेगा, इससे जोखिम कम होगा और युद्ध क्षमता बढ़ेगी, दुनिया के कई देश रोबोटिक सैनिक की तरफ रुख कर रहे हैं और अब इस दिशा में भारत भी काम शुरू करने जा रहा है। भारतीय सेना हाई-रिस्क मिशन के लिए AI ह्यूमनॉइड कॉम्बैट रोबोट पर लक्ष्य बनाकर चल रही है।
इस ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित करने में मजबूत और ताकतवर मोटर्स (actuators), अलग-अलग सेंसर का इस्तेमाल, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें शामिल की गई है, AI और मशीन लर्निंग की मदद से यह रोबोट खुद से चलना, रास्ता पहचानना और फैसले लेना सीख सकेगा. जरूरत पड़ने पर इसे इंसान द्वारा कंट्रोल भी किया जा सकेगा.
भारतीय सेना IDEX ADITI 4.0 के तहत एक बड़े और नए लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा रहा है, जिसमें एक ऐसे ह्यूमनॉइड (इंसानों जैसे) ऑटोनॉमस रोबोट हाई-एल्टीट्यूड वॉरफेयर, काउंटर-टेरर ऑप्स, लॉजिस्टिक्स और फ्रंटलाइन सपोर्ट के लिए अच्छे से काम कर सके।
ह्यूमनॉइड रोबोट की विशेषताएं :
- ऊबड़-खाबड़ इलाकों में इंसानों की तरह चलना और ऑपरेट करना।
- सामान ले जाना, खतरनाक ज़ोन में जाना और लड़ाई के हालात में सैनिकों को सपोर्ट करना।
- नेविगेशन, फैसले लेने और मिशन पूरा करने के लिए AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करना।
- यह वहां काम करेगा जहां सैनिकों के लिए सबसे ज्यादा रिस्क हो।
भारत अब ड्रोन से आगे, बैटलफील्ड रोबोट की ओर देख रहा है जो एक दिन सैनिकों के साथ लड़ सकें, घूम सकें और ऑपरेट कर सकें।