नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले बयानों पर सख्त रुख अपनाया है और शीर्ष अदालत ने शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) का नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर की गई है, हालांकि पत्रकार निखिल वागले ने लिखित मांग ली है लेकिन सुप्रीम कोर्ट इनको माफ़ करने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई:
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी किया। हालांकि, अदालत ने दोनों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी करने की मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया।
अटॉर्नी जनरल ने दी मंजूरी:
इस मामले में देश के शीर्ष विधि अधिकारी, अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणी ने अपनी लिखित सहमति दी थी और AG के मुताबिक, दोनों के सोशल मीडिया पोस्ट पहली नज़र में अपमानजनक हैं और उनका स्पष्ट उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश के पद की गरिमा को मलिन करना था।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद अक्टूबर महीने में तब शुरू हुआ, जब विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर CJI सूर्यकांत से मिलने का समय मांगा था और सीजेआई कार्यालय ने इस मुलाकात से इनकार करते हुए उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट में याचिका दायर करने की सलाह दी थी लेकिन इस फैसले के बाद दोनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर निचे दी गई कथित टिप्पणियां की थी:
- निखिल वागले का रुख: पत्रकार निखिल वागले ने सीजेआई के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया और कोर्ट व सीजेआई से माफी मांग ली।
- संजय राउत के आरोप: सांसद संजय राउत ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।
एससीबीए (SCBA) का तर्क है कि ये भ्रामक बयान जानबूझकर जनता के बीच न्यायपालिका की छवि खराब करने के लिए दिए गए हैं और सुप्रीम कोर्ट ने अब इस पूरे मामले पर दोनों से औपचारिक जवाब मांगा है।