Today Sunday, 03 May 2026

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​फर्जी जन्म प्रमाणपत्र महाघोटाले में डूबी मुंबई मनपा


मुंबई, महाराष्ट्र :
मुंबई महानगर पालिका का रेवेन्यू देश के कई राज्यों के बजट से ज्यादा है लेकिन इस रेवेन्यू का सदुपयोग मुंबई की आम जनता के लिए करते समय हमेशा घोटाला ही किया जाता है क्योंकि मनपा में अभी ताजा बहुत बड़े बर्थ सर्टिफिकेट स्कैंडल का पर्दाफाश भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता किरीट सोमैया ने किया जिसमे उन्होंने सनसनीखेज दावा किया है कि मुंबई मनपा के 24 वार्डों में कुल मिलाकर 87,149 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र स्वस्थ्य विभाग के अधिकारीयों की मिलीभगत से बनाए गए हैं जिसमे नाम परिवर्तन या छोटे मोटे सुधार भी अवैध तरीके से किए गए हैं और यह सब फर्जी जन्म प्रमाण पत्र अवैध बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या घुसपैठियों के हैं जो मुंबई के लिए ही नहीं पूरे भारत देश के लिए खतरा है। इस घोटाले के पर्दाफाश होने पर शुरुवाती जाँच में ही तीन अधिकारी निलंबित किए जा चुके है। इस महाघोटाले में सबसे ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र एम-पूर्व (M/E ) वार्ड और एल वार्ड में हुआ है जो सबसे ज्यादा मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है। 

शुरुवाती जांच :
शुरुआत में एम-पूर्व (M/E ) वार्ड में अवैध घुसपैठियों के लिए नकली बर्थ सर्टिफिकेट पर छिटपुट कार्रवाई के तौर पर जो शुरू हुई थी, वह धीरे धीरे बढ़कर बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के सभी 24 वार्डो में फैलता हुआ मिला और मनपा के अंदर भ्रष्टाचार करने के लिए अधिकारीयों ने ही गैर कानूनी रूप से मनपा के पुराने सिस्टम का ही इस्तेमाल किया गया, जहां अधिकारियों ने ज़रूरी रिकॉर्ड्स का "शैडो लेजर" बनाए रखने के लिए नेशनल प्रोटोकॉल को बाईपास किया।

"पुराने टेक्निकल सिस्टम" को बनाया हथियार :
इस नकली जन्म प्रमाण पत्र के केंद्र बिंदु में मेडिकल ऑफिसर्स ऑफ़ हेल्थ (MOHs) शामिल पाए गए है, जिन्होंने इस देश विरोधी महा भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए नए टेक्निकल प्लेटफॉर्म CPWM के लिए ज़रूरी सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) को नज़रअंदाज़ करते हुए बिना अनुमति के पुराने इंटरनल प्लेटफॉर्म SAP का इस्तेमाल किया जो कि यह सिर्फ़ एक टेक्निकल गड़बड़ी नहीं थी बल्कि यह एक बड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव बाईपास था।
  • नंबर: 2024 और 2026 के बीच, बिना इजाज़त वाले SAP सिस्टम के ज़रिए 87,000 से ज़्यादा करेक्शन किए गए।
  • ऑफिशियल रिकॉर्ड: उन करेक्शन में से सिर्फ़ 33,772 ही ऑफिशियल CRS पोर्टल पर दिखाए गए। 
  • रिस्क: इस अंतर ने डेटा में हेरफेर और गैर-कानूनी डॉक्यूमेंट जारी करने के लिए अधिकारीयों को बचने का एक बड़ा रास्ता बना दिया।

जिम्मेदारी और कार्रवाई:
BMC कमिश्नर अश्विनी भिडे ने तुरंत अनुशासनात्मक कदम उठाकर इस "वर्कअराउंड कल्चर" को खत्म करने के लिए कदम उठाया है।
  • सस्पेंशन और FIR: अब तक तीन मेडिकल ऑफिसर को सस्पेंड किया गया है, जिनमें M-ईस्ट, L, और E वार्ड के ऑफिसर शामिल हैं। कई ऑफिसर और क्लर्क के खिलाफ क्रिमिनल केस (FIR) दर्ज किए गए हैं।
  • सिस्टम शटडाउन: BMC ने सभी SAP-बेस्ड एंट्री को तुरंत रोकने का आदेश दिया है और आगे बिना इजाज़त एडिट को रोकने के लिए MOHs का IT एक्सेस रद्द कर दिया है।
  • प्रशासनिक फेरबदल: भविष्य में अकाउंटेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए, BMC ज़्यादा अंतर वाले वार्ड में अधिकारियों का फेज़ में ट्रांसफर कर रही है और MOH की ज़िम्मेदारियों का पुनर्गठन कर रही है।

सबसे पहले पूर्व MP किरीट सोमैया ने इस जांच को हरी झंडी दिखाई थी, जो प्रोटोकॉल को बायपास करने के एक गहरे गठजोड़ को दिखाती है। हालांकि अभी रजिस्ट्री को साफ और सुदृढ़ करने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन यह महाघोटाला इस बात की साफ याद दिलाता है कि कैसे "शैडो सिस्टम" पूरे शहर के डेमोग्राफिक डेटा की लीगल इंटीग्रिटी को कमजोर कर सकते हैं।


















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